मंडली

जब संतूर के शहंशाह ने तबले पर छोड़ी छाप …

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बात उन दिनों की है जब पंडित हरि प्रसाद और विश्व विख्यात मशहूर संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा सचिन देव बर्मन के साथ काम किया करते थे। पंडित शिवकुमार शर्मा की राहुल देव बर्मन के साथ गहरी दोस्ती थी। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इसी दोस्ती की वजह से ही शिवकुमार शर्मा ने अपने बेटे का नाम भी राहुल रखा था। चूँकि उनके घर आसपास ही थे, इसलिए शामें भी अक्सर साथ में ही गुज़रा करती थीं। अक्सर रात होते ही वे दोनों गाड़ी में संगीत सुनते हुए लाँग ड्राईव पर निकल पड़ते थे और फिर छिड़ जाती थी कई अनसुनी धुनें। वो धुनें जो आपने आने वाली कई फिल्मो में सुनी होंगी। लाँग ड्राइव पर बनाये गए कई गीतों के बारे में तो गुलज़ार साहब ने भी कई बार बताया है। फिलहाल हम लौटते हैं शिव कुमार शर्मा जी और उनके तबले पर।

चौंक गए ना आप? आपको लगा होगा संतूर की जगह तबला लिखकर गलत लिख गया मैं। जी नहीं, शिव कुमार शर्मा तबला भी भी उतना सुंदर बजाया करते थे, जितना सुंदर वह संतूर  बजाते थे । शिव कुमार शर्मा जी अकले ऐसे हरफनमौला कलाकार नहीं थे और इसके पहले कई कलाकरों ने ये कारनामा दोहराया है। पंडित बिरजू महाराज ने कत्थक ही नहीं, ठुमरी गायन में भी अपना बहुत नाम कमाया है। पंडित रविशंकर सितार के सर्वश्रेष्ठ वादक होने के साथ साथ बहुत निपुण नर्तक भी थे।

ऐसा कहा जाता है कि राहुल देव बर्मन स्वतंत्र रूप से संगीतकार बन जाने के बाद भी काफ़ी समय तक अपने पिता सचिन देव बर्मन को असिस्ट करते रहे थे। अपने पिताजी की रिकॉर्डिंग के दौरान एक रोज़ बातों बातों में राहुल देव बर्मन को पता चला कि शिवकुमार शर्मा तबला भी बजाते हैं तो उन्होंने शिवकुमार शर्मा से फ़िल्म गाईड में तबला बजाने को कहा। शिवकुमार शर्मा इसके लिए तैयार नहीं हुए क्योंकि तबले का रियाज़ वह काफ़ी समय पहले ही छोड़ चुके थे और अब उनका पूरा ध्यान संतूर पर था।

पंचम ठहरे महाज़िद्दी , ना उनको मानना था और ना वो माने, वो अपनी ज़िद पर अड़े ही रहे जब तक शर्मा जी से उन्होंने हाँ नहीं करवा ली। शिव कुमार शर्मा इसलिए भी घबराए हुए थे क्योंकि शास्त्रीय संगीत पर आधारित था। गीत बड़े बर्मन साहब द्वारा रचित नृत्यगीत था और उसमें कमी की ज़रा भी गुंजाईश नहीं थी। मजबूरन हारकर उन्हें अपने दोस्त की बात माननी पड़ी। और फिर उन्होंने जो तबला बजाया, बहुत ही शानदार बजाया।

जानते हैं आप वह गीत? वह गीत था लता जी द्वारा गाया … मोसे छल किए जा, सईयां बईमान …

शिव कुमार शर्मा के अनुसार सिर्फ यही एक ऐसा फ़िल्मी  गीत है जिसमे उन्होंने तबला बजाया है और यह बात सिर्फ कुछ ही लोगो को मालूम है ।

पंडित शिव कुमार शर्मा का बजाया तबला आप भी सुनिए …

लेखक: मनीष श्रीवास्तव (@Shrimaan)

लेखक मुख्य रूप से भावनात्मक कहानियाँ और मार्मिक संस्मरण लिखते हैं। उनकी रचनाएँ आम बोलचाल की भाषा में होती हैं और उनमें बुंदेलखंड की आंचलिक शब्दावली का भी पुट होता है। लेखक का मानना है कि उनका लेखन स्वयं की उनकी तलाश की यात्रा है। लेखक ‘मंडली.इन’ के लिए नियमित रुप से लिखते रहे हैं। उनकी रचनाएँ 'ऑप इंडिया' में भी प्रकाशित होती रही हैं। उनके प्रकाशित उपन्यास का नाम 'रूही - एक पहेली' है। उनका एक अन्य उपन्यास 'मैं मुन्ना हूँ' शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। लेखक एक फार्मा कम्पनी में कार्यरत हैं।

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