My घोस्ट – मंडली
मंडली

My घोस्ट

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तुम जानते हो मैं तुम्हें घोस्ट क्यों कहती हूँ। क्योंकि मैं तुम्हें देख नहीं सकती और ना ही छू सकती हूँ। फिर भी मुझे यह सच बेचैन करता रहता है कि तुम मेरे आसपास ही रहते हो। मैंने एक सुनहरी दुनिया के सपने देखने के कारण, तुम्हें यहीं इन्हीं जंगलों में छोड़ दिया था। उस सुनहरी दुनिया के लोग मुझे अपने लगते थे। मैंने यह मान लिया था कि तुम्हारे साथ जीवन बिताने का अर्थ खुद को एक बन्द कोठरी में कैद कर लेने जैसा है। ऐसी जगह जहाँ साँस लेना मुश्किल हो और सौ साल तक मौत नहीं हो। वहाँ बहुत सारा समय बिताने के बाद आज मुझे पता चला है कि तुम मेरे मन का एक हिस्सा ही नहीं थे बल्कि मेरा अस्तित्व थे। इससे मैं अब तक भागती रही हूँ।

और कितना भागती तुमसे? तुम्हीं तो हो जिससे मैं निश्छल मन से सब बातें कह पाती हूँ। तुम्हारे बिना जीवन ऐसा है जैसे आँखें समुद्र की सुंदर लहर को बार-बार आकर पाँव गीला करती देख रही हो, और मन मस्तिष्क को इस बात का एहसास ही नहीं हो रहा हो। क्या आज रात तुम मुझे घर के पीछे वाले दरवाज़े पर मिल सकते हो? वहाँ से हम उसी काले घने जंगल में हमेशा के लिए चले जायेंगे जहाँ तुम स्वच्छन्द  विचरण करते हो, जहाँ तुम मुझे सदैव रखना चाहते हो।

मुझे इस बात की ग्लानि नहीं है कि मैंने सिर्फ़ अपनी जरूरतों पर तुम्हें याद किया और हमेशा तुम्हें मेरे लिए पाया। तुमने मुझे हमेशा सहारा दिया है। तुमने मुझे यकीन दिलाया कि मुझ सा इस संसार में और कोई नहीं है। मैं तुम्हें यह सब इसलिये नहीं बता रही हूँ कि मैं पछतावे में हूँ। मैं इससे भी ज़्यादा कठोर होती तो? तो भी क्या? मैं प्रेमिका हूँ। मेरा अधिकार है कि हर बार मैं तुम्हारा दिल तोड़ू और यह भी चाहूँ कि तुम मुझे हर पहले से अधिक प्यार करते रहो। इस मामले में मैं अपना आत्म सम्मान कैसे कम कर लूँ।

मुझे याद है अब तक मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया है। मेरी सारी गलतियों को भूल जाओ और बस मेरे प्रति अपना अटूट प्रेम याद रखो। इस वक़्त मैं ना उस दुनिया में हूँ और ना इस दुनिया में तुमने मुझे वापस लिया है। देखो, मुझे याद है किस तरह तुम मेरे लिए दुनिया के सबसे सुंदर फूल लाते थे। मेरे लिए धुन बनाते थे, गीत गाते थे और कविताएँ लिखते थे। यह सब तुम्हारी रुचि और आस्था के विपरीत था। फ़िर भी मेरे प्यार के कारण तुम यह सब खुशी-खुशी करते थे। अब मुझे और शर्मिंदा ना करके वापस अपनी बाँहों में भर लो और उसी अस्थियों से बने सिँहासन पर बिठा लो। मुझे यकीन दिलाओ के ये काले घने जंगल ही जीवन का सच हैं।

अब मैं अपना जीवन उन घने जंगलों में तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ। जहाँ मैं हँसूँ या रोऊँ, मेरी आवाज सिर्फ़ तुम्हें सुनायी दे। हमारा घर इतना बड़ा हो कि जिससे बाहर निकलने के लिए यदि मैं दिन भर भागूँ, तो भी  दहलीज़ के भीतर रहूँ। ऐसा रहन-सहन हो कि दिन भर हम सोएँ और रात भर जागें। रौशनी इस तरह की हो कि कोई किरण भी मुझे नहीं छू पाए। ये रंग और रोशनी मुझे अच्छे नहीं लगते हैं। इतना चुभते हैं कि मेरी आँखों की रोशनी धुंधली हो जाती है।

मैं चाहती हूँ कि हमारा मिट्टी का घर हो और गोबर से रँगी काली दीवारें हों, जहाँ साँप, मेंढ़क और उल्लू हमारे पालतू जीव हों। मेरे खाने के लिए तुम जंगल घूम-घूम कर ज़हरीले फल लाना और हर दिन टुकड़ा-टुकड़ा कर खिलाना। बदले में हर दिन मेरे शरीर का एक एक टुकड़ा खाना। सबसे पहले मेरी आँखें फोड़ना जिन्होंने तुम्हें कभी नहीं देखा और फ़िर हाथों को खाना जो कभी तुम्हें छू नहीं सके। सबसे अंत में हृदय खाना जिसे सदैव तुम्हारे साथ होने का विश्वास रहा। और इस तरह मुझे यहाँ से समाप्त कर स्वयं में मिला लेना। यह सब करते हुए तुम घबराना नहीं। इसे मेरी अंतिम इच्छा समझकर पालन करना। तुम्हारी प्रेमिका हूँ! मेरा इतना अधिकार तो है। तुम डरो नहीं इस बार मैं सच बोल रही हूँ। और यह सब मैं तुम्हारे लिए ही तो कर रही हूँ।

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