मंडली

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-3

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गतांक से आगे

एक पल को सारी प्लानिंग और चालाकी बेवजह सी लगी। मैं क्लास में अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर पाया। गेट पर ही खड़ा रहा। भैया का गाना खत्म हुआ। देखने से लग रहा था कि पूजा काफी इम्प्रेस हुई थी। मुझे बुरा लगा। मैं वापस होने को ही था कि अविनाश भैया ने मुझे आवाज़ दी। धीरे से उन्होने पूजा से पूछा, “ये वही है ना तुम्हारे दूर का भाई? पूजा ने कुछ जवाब दिया जो सिर्फ ‘हाँ’ से बड़ा था। मैं पास गया तो भैया ने कहा कि पूजा को हॉस्टल छोड़ता हुआ अपने रूम पर चला जाऊँ। मैंने हाँ में सर हिलाया। शायद यह लम्हा मेरे लिए स्पेशल होता पर लग नहीं रहा था। मैं यह सोचकर बहुत नर्वस था कि कहीं पूजा को किसी और से प्यार ना हो जाये। मेरा क्या होगा? ज़िंदगी में एक लड़की पसंद आयी है। इंतज़ार करूँ उसका मेरे प्यार के रंग में रंगने का या और कोशिशें करूँ।

मेरे नकारात्मक ख़यालों का तांता तब टूटता है जब पूजा दुबारा मेरा नाम लेती है। मैं चौंक कर उसकी तरफ़ देखता हूँ। अब थोड़ा बेहतर महसूस होता है। मैंने धीमी आवाज़ में कहा कि चलो हॉस्टल छोड़ देता हूँ। उसने कहा, “रोहित, क्या अविनाश सर को हम सच बता सकते हैं?” मैंने कहा कि सिर्फ उन्हीं से क्यों? उसने उत्तर दिया,” जिससे बात होती हो, उससे अनजाने में भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। लोग बुरा मान जाते हैं।“ मैं यह बात सोचता रहा और यह फार्मूला अपनी सिचुएशन पर अप्लाई करता रहा कि उसका हॉस्टल आ गया।

हॉस्टल के गेट के सामने बाइक से उतरकर मैं खड़ा हो गया। वह अंदर जा रही थी। मैंने चहरे के भावों को सहज करते हुए पूछा, “अच्छा पूजा, अविनाश सर को पता है कि तुम्हें उनके क्लास के लड़के परेशान करते हैं?” उसने हाँ में उत्तर दिया। मैंने आगे पूछा कि वो तुम्हारी मदद क्यों नहीं करते हैं। उसने कहा,”सर कहते हैं कि मुझे ऐसे लोग आगे भी मिलेंगे। मुझे उन्हें डील करना आना चाहिए। अब हमेशा कोई सुपरमैन तो मुझे ऐसे लोगों से बचाने आएगा नहीं।“

“हो सकता है कोई आ ही जाए, सुपरमैन ना सही, कोई मैडमैन। तुम्हारे लिए पागल।”, मैंने बात आगे जोड़ी। इससे पहले पूजा कोई जवाब देती उसके हॉस्टल की कोई लड़की बाहर आ गयी। पूजा ने उसे मेरा रूममेट दीदी के रूप में परिचय कराया। लड़की ने मेरे बारे में पूछा तो पूजा ने ‘दोस्त है’ कहा। मुझे यह सोचकर चैन की सांस आयी, कम से कम पूजा मुझे भाई तो नहीं बनाना चाहती है। इसके साथ ही ख्याल आया कि पूजा की रूमी दीदी से दोस्ती ठीक रहेगी।

रूम पर वापस सोच रहा था कि मैं इतनी प्लानिंग और प्लाटिंग कर रहा हूँ, यह कहाँ तक सही है। पहले की डरावनी मूवीज में दिखता था कि हीरो अगर मर गया है तो मर कर आत्मा उसकी प्रेमिका के पास यह संदेश लेकर जाती है कि अब तुम भी मर जाओ और मुझसे मिलन करो। मैं सोच रहा था इतने एफर्ट्स मुझे कैसा इंसान बनाए दे रहे हैं। दो बंदों की पिटाई का मुझे गम नहीं था क्योंकि पिटाई वो दोनों ही डिज़र्व करते हैं। मेरी नज़र में मैं कोई औसत लड़का नहीं जो लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर लगाए। लड़की को बिना बताए लड़के पीटने के इंतज़ाम करे या उसकी रूमी से बातचीत इस कारण बढ़ाये कि कल को वह मदद कर सकती है। मेरा प्रेम तो एक दूसरे को देख कर गिटार बजने लगे, ऐसा होना चाहिए था। ख़ैर, एक दो हफ़्ते तक रूम-कॉलेज-पूजा और पूजा की रूममेट दीदी चलता रहा।

ज़िंदगी बोझिल हो ही रही थी क्योंकि बात आगे नहीं बढ़ रही थी। तभी एक दिन पूजा ने आकर मुझे कह दिया, “रोहित तुम क्लास में मत आया करो।“ मैंने उस वक़्त तो कुछ नहीं कहा पर शाम को पूजा को फ़ोन किया और पूछा कि किसी ने कुछ कहा है। उसने कहा कि जिस तरह से तुम क्लास में आते हो और मुझे देखते हो उससे गलत मेसज जाता है। लोग शक करते हैं कि भाई-बहन की आड़ में हमारे बीच कुछ चल रहा है। मन ना अम्लीय था ना क्षारीय, उदासीनता से पूछा कि क्लास में नहीं आने से क्या उनका शक खत्म हो जाएगा। उसने उत्तर दिया, “बात यह है कि मैं असहज हो जाती हूँ।” मैंने कहा कि ठीक है, अब से नहीं आऊँगा। आगे पूछा कि कल J K टेम्पल चलोगी? उसने जवाब दिया, “नहीं”। मैंने फ़ोन डिसकनेक्ट किया।

शाम को मैंने पूजा को टेक्स्ट किया कि तुम्हे परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। एक दोस्त के जैसे बात कर सकती हो। मैं आर्ट गैलरी की एक लड़की को पसंद करता हूँ। पूजा ने ‘ठीक है’ कहा। मैंने अविनाश भैया के बारे में पूछा। उसने जवाब दिया कि क्लास नहीं आए काफी दिनों से, शायद होमटाउन गए हों। मैंने पूछा कि आइसक्रीम खाओगी। उसका कॉल आया। लाइन पर उसकी रूमी दीदी थीं। उन्होंने हँसते हुए कहा,” देखो रोहित जो भी लाना, दो लाना”। मैं आइसक्रीम लेकर होस्टल के गेट पर गया। पूजा और रूमी दोनों आयी। मैंने हँसी मजाक करते करते रूमी दीदी का नंबर ले लिया। वो मुझे बहुत प्यार से देखती थीं। रॉंग नंबर ना लग जाये, इस डर से मैंने उन्हें पहली नज़र में बहन बना लिया।

अब सब ठीक था। पूजा से बात होती थी। वह दोस्त समझकर मुझसे खूब बातें करती थी। अगले हफ़्ते उसकी रूमी दीदी और उसे नवाबगंज वाला चिड़ियाघर घुमाने ले गया। और बातचीत हो रही थी तो क्लास ना जाने का दुख भी नहीं था। एक दिन क्लास से बाहर निकल ही रहा था कि अविनाश भैया सामने खड़े थे। मैंने सकपकाकर हेलो बोला। उन्होंने कहा, “रुको और कायदे से सुनो बे, आज के बाद उसके आस-पास दिखायी पड़े तो योगेश से भी बुरा कूटे जाओगे। साले, बहन बनाकर ऐसी हरकतें कौन करता है।“ मैंने हिम्मत कर कहा, “भैया, वो दोस्त है। मैंने उसकी हमेशा मदद की है और आप उन लड़कों को कुछ क्यों नहीं बोलते जो उसे तंग करते हैं? आप तो उसे खुद डील करने को छोड़ देते हैं।“ उन्होंने कहा,”क्योंकि वैसे लड़के उसको मेंटली स्ट्रांग बनाएंगे और तुम जैसे उसे कमज़ोर करेंगे। तुझे नहीं पता तू उसके सामने अच्छा होने का नाटक क्यों करता है? क्योंकि तू झूठा है।”

एक बार तो मन किया कि भैया को झापड़ मार दूँ। फिर सोचा, अब पूजा को प्रोपोज़ करना ही पड़ेगा।

क्रमश:

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-1

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-2

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-4

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-5

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-6

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-7

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-8

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-10

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-11

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-12

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।