मंडली

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-2

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गतांक से आगे

उसे देखकर कहने मात्र को मेरे पैर ज़मीन पर थे। कल्पनाओं के सातवें आसमान से ऊपर भी यदि कुछ होता है तो मेरा मन वहाँ पर था। मैं कैसे हार मान लेता? ज़िंदगी का पहले प्यार होने जा रहा था, हालांकि हर बार प्रेम स्वप्न को कपिल के ‘भाई है’ शब्द बाधित कर रहे थे। मैं एकतरफ़ा आशिक़ होने के लिए नहीं बना था। यह जानना ज़रूरी हो गया था कि मुझे प्रेम करने में उसकी तरफ़ से कितना समय लगना है।

अगले दिन सुबह योगेश मेरे कमरे पर आया। कपिल ने उसे बहलाया कि लड़की बहुत सीधी है, थोड़ा समय लगेगा बात करने में। योगेश ने बेचैनी भरी आवाज़ से कहा कि यदि तुम दोनों से नही हो पा रहा है तो मैं खुद बात कर लूँगा। बैच के लड़कों ने इसे एक मिशन की तरह समझ लिया है। रोज़ कोई ना कोई साथ का लड़का A सेक्शन में इंट्रोडक्शन लेता दिख जाता है। वो साला अविनाश तो पिछली सीट पर कब्जा बना चुका है।

योगेश को पट्टी पढ़ाकर कपिल और मैं कॉलेज गए। क्लास में मन नहीं लग रहा था। बार-बार बाहर निकल कर वाशरूम या वाटर कूलर के पास जा खड़े हो रहे थे। खिड़की से ज़रा सी झलक में वो दिख रही थी। एक दिन की 3 क्लासेज खत्म हो गयी थीं। मैं इंस्टीट्यूट के बाहर बायीं ओर बने पार्किंग स्पेस को जा रहा था कि अचानक मुझे किसी लड़की ने पीछे से आवाज़ दी; “रोहित!”

मैंने पलटकर देखा तो वो थी।

कपिल कहाँ है? उसने मुझसे नोट्स लेकर किसी को दिए थे। वापस नहीं किये।

सकपकाहट में कुछ बोला नहीं गया, पर अपनी मधुरतम मुस्कुहाट के साथ मैं उसे देखने लगा।

मेरा नाम पूजा है। मैं A सेक्शन से हूँ जिसे तुमने बहन बनाया है।

मेरी ज़ुबान ने लड़खड़ाते हुए कहा, “अच्छा हाँ, कपिल ने बता दिया था। तुम यहीं रहती हो?”

नहीं, पास में हॉस्टल है।

मैंने दुनिया भर की चालाकी बटोर कर एक साँस में कहा, “अपना नम्बर और होस्टल का एड्रेस दे दो। मैं नोट्स कपिल से लेकर तुम्हें आज ही दे जाऊँगा।“

पूजा ने सरलता से उत्तर दिया, “कोई बात नहीं, नोट्स कल ले लूंगी। आप परेशान मत हो।“ फिर कुछ सोचते हुए उसने कहा, “आप नम्बर ले लीजिए, एक दूसरे काम लगता रहेगा। हॉस्टल पास में ही है, आहूजा हाउस के बगल वाला।

मैंने स्माइल की… और उसने भी।

कमरे पर पहुँचा तो मैंने देखा कि कपिल के साथ 7-8 सीनियर्स बैठे हैं। कोने में आकर कपिल ने मुझे बताया कि उन सबको मुझसे बात करनी है। मैं कपड़े चेंज करके रूम में आया और बात करने को बैठ गया।

ग्रुप लीडर बोला, “देख रोहित, तेरी बहन के बारे में बात करनी है।“

मैं कन्फ्यूज हो गया। कपिल ने चालाकी से पूछा कि बात क्या है।

ग्रुप लीडर के चमचे ने कहा, “आपकी बहन ने भैया के साथ बदतमीजी की है। भैया सच्चे दिल से उसे पसंद करने लगे थे। प्रोपोज़ करने पर लड़की ने भगवान को कोसा कि उसके क्या दिन आ गए हैं कि ऐसे लड़के उसे प्रोपोज़ करेंगे। इतना ही नहीं, आज ग्रुप के दूसरे दोस्त ने उससे बात करने की कोशिश की तो उसने अपने दोस्तों के सामने कहा कि 2-3 इंच और बढ़ जाओ तब मुझसे बात करने आना।“

इससे पहले वो और कुछ कहता, कपिल ने बात काट दी और लिबिर लिबिर करते हुए कहा,”अर्रे भैया, सगी थोड़ी ना है। वैसे तो सीधी ही है। चलो हम बात कर लेंगे। आप लड़कों को कह दीजिये उसे परेशान न करें।“

ग्रुप लीडर ने मेरी ओर देख कर कहा, “तुम्हारी बहन है, उसको बोलो मुझे माफ़ी मांगे। मुझे भाई मानते हो तो कम से कम दूसरे ग्रुप के अविनाश से उसे पटने ना देना।“

मैंने मरी हुई आवाज़ में बस इतना कहा, “बहन नहीं, रिश्तेदार।”

यह बात कर सारे निकल गए।

एक साथ इतने सारे दुःख मुझ मासूम पर टूट पड़े पर इन सब पर उसके नम्बर का मिलने का परम सुख भारी था। शाम को मैंने उसे फ़ोन किया।

हेलो पूजा

कौन?

मैं तुम्हारे कॉलेज से, वो क्लासेज के बाद मिले थे ना, नंबर लिया था।

रोहित?

हाँ। मुझे बताना था कि कल तुम्हें नोट्स मिल जायेंगे।

कोई बात नहीं।

फिर मैंने पूछा,”और सब ठीक है? कोई परेशानी तो नहीं है कॉलेज में, मन लग रहा है।”

उसने जवाब दिया, “हाँ सब ठीक है। रोज़ कुछ ना कुछ एंटरटेनमेंट होता रहता है। मन लग भी रहा है और नहीं भी। सीनियर्स तंग करते हैं।“

कोई पसन्द आया?

नहीं।

और वो अविनाश?

अर्रे वो तो बहुत सीधे हैं। गाना सुनाकर वापस भेज देते हैं। मुझे अच्छी लड़की समझते हैं। मुझसे मीन मीडियन मोड के सवाल पूछते हैं और कहते हैं कि मैं क्यूट हूँ।

मैंने ज़ोर दिया,”सच बताओ, तुम्हें कोई लड़का पसन्द नहीं आया?”

उसने सोचकर कहा,” सच बोलूँ तो एक सुपर सीनियर हैं। वो अच्छे लगते हैं। करन नाम है, बहुत अच्छे दिखते हैं। वो चाहते हैं मैं उनके साथ कल J K टेम्पल जाऊं।”

मैंने पूछा, “तुम क्या चाहती हो।“

उसने जवाब दिया; “टेम्पल जाने का मन है मेरा।“

मैंने सकपकाकर कहा, “ओह! ठीक है। फ़िर कभी बात करेंगे। अपना ख़याल रखना।“

मैंने फ़ोन रख दिया। खोपड़ी का भरता बन चुका था। दिमाग़ में कुछ बात आयी और मैंने योगेश को फ़ोन किया और कहा कि मैंने लड़की से बात की है और यदि कल वह उसे प्रोपोज़ कर दे तो बात बन सकती है। दूसरे कॉल से ग्रुप लीडर को बताया कि कल योगेश पूजा को प्रोपोज़ करने वाला है। कपिल से कह कर DAMS कॉलेज के लड़के बुलवाए। क्लासेज खत्म होने के बाद कपिल के साथियों को मैंने कैफेटेरिया के सामने खड़ा होने को बोला। सुपर सीनियर रोज़ उधर से ही आता था। इधर योगेश, पूजा के इंतज़ार में इंस्टिट्यूट के बाहर खड़ा था। ग्रुप लीडर और बाक़ी लड़के पार्किंग से उसे देख रहे थे।

पूजा इंस्टिट्यूट से निकलक बाहर बने बेंच पर बैठ गयी। योगेश लहराता हुआ पूजा के पास गया और उसने कुछ कहा। दूर से देखकर यह लगा जैसे पूजा ने उसे डाँट कर भगा दिया। ग्रुप लीडर और लड़के हुल्लड़ करने लगे। वे योगेश को तेज़ आवाज़ में ताने देने लगे, “ये घोड़ों की रेस में गधे कब से आने लगे।“ पूजा उन्हें देखकर वापस अंदर क्लास की तरफ़ चली गयी। योगेश ने खीझकर ग्रुप को ‘गंवार साले’ कहा और लड़कों ने उसकी धुनाई कर दी। दूसरी ओर कपिल के बुलाये लड़कों ने सुपर सीनियर को बहुत कूटा।

जैसे ही दोनों लड़को के कूटे जाने की खबर मिली, मैं A सेक्शन में दौड़ता हुआ गया। दो बातें मन में कौंध मचाये थीं। मैं एक यह जानना था कि पूजा को कुछ पता तो नहीं चला और दूसरा यह कि यदि वह फ्री हो तो JK टेम्पल चला जाए। हीरो वाली फीलिंग के साथ मैं क्लास के अंदर पहुँचा और मैने देखा कि क्लास की पिछली सीट पर अविनाश भैय्या पूजा के साथ बैठे उसे ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गीत सुना रहे थे।

क्रमश:

मेरी गर्लफ्रेंड भाग- 1

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-3

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-4

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-5

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-6

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-7

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-8

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-10

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-11

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-12

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।