मंडली

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

शेयर करें

गतांक से आगे

शरीफ़ ने मैसेज करके मुझे कहा कि मैं माँ को लेकर कहीं जाऊँ ताकि वो दोनों बाहर निकल सकें। रूम के बाहर माँ को देख कर मेरे कानों में साँय-साँय होने लगा था। मुझे हर साँस से आने वाली आह साफ सुनायी दे रही थी। मेरी नसों में बह रहा खून भी साफ सुनने लायक आवाज़ दे रहा था पर माँ चिल्लायी जा रही थीं और मुझे कुछ भी सुनायी नहीं दे रहा था। माँ ने मुझे एक बार फ़िर कहा, “बहरे हो गए हो क्या दरवाजा खुलवाओ।“ मैंने दुबारा हाथ से दरवाजा थपथपाया। अंदर से शरीफ़ ने कहा, “रोहित तुम अकेले हो क्या”? माँ ने मुझे घूर कर इशारे में “हाँ” कहने को कहा। मैने वैसा ही किया। दरवाजा खुल गया।

कमरे में अकेला शरीफ ही दिखा तो मुझे सुकून मिला पर माँ को देखकर लगा जैसे उन्हें कुछ अजीब महसूस हो चुका था। हम तीनों लोगों ने एक ही कमरे में बैठ कर एक दूसरे की ओर ना देखने की कसम खा ली थी। इतने में माँ ने चुप्पी तोड़ी और सर दर्द की गोली माँगी। शरीफ़ ने जोर देकर कहा कि वो ले आएगा और बाहर चला गया। उसके जाते ही माँ अब मेरी ओर देख रही थीं। मैंने टोन सहज करते हुए कहा. “माँ ये दोस्त है और इसका नाम शरीफ़ है”। माँ ने कहा,”हाँ पता है कितना शरीफ़ है। बेड के नीचे लड़की के सैंडल छुपाए हैं, बड़ा आया शरीफ़।“ माँ ने आगे कहा, “पढ़ाई-लिखाई की उम्र में यह सब कर रहे हो। तुम सबकी अब शादी कर देनी चाहिए। यहाँ जो लड़की बेड के नीचे छुपी है वो तुम्हारी वाली है या उसकी?” मैंने जुबान का लड़खड़ाना रोकते हुए कहा “अर्रे मम्मी मैं कहाँ, उसी की है।” माँ ने कहा “तो ऐसा हो नहीं सकता तुम्हारी कोई हो नहीं, इसलिए उससे भी मिलवाओ।” मुझे एक पल को कुछ नहीं सूझा और कमरे में छुपी शरीफ़ की गर्लफ्रैंड को ज़ोर से आवाज़ देकर बाहर निकलने को कह दिया।

शाम को मैंने पूजा को फ़ोन करके मिलने को पूछा। वह गुस्सा तो थी पर शायद निराश ज़्यादा थी। उसने मिलने के लिए हाँ कर दी। माँ को राधा कृष्ण मंदिर छोड़ता हुआ मैं पूजा से मिलने चला गया। मुझे उम्मीद थी कि वह मुझसे शरीफ़ वाले एपिसोड के बारे में पूछेगी। ऐसा नहीं हुआ। मैंने अपने मन से जितने कोड़े खुद को मारने थे, मार लिए। मैंने पूजा से पूछा, “मैं अनजाने में इतनी गलतियां करता हूँ पर तुम मुझसे कोई शिकायत नहीं करती और ना ही डाँट लगाती हो।” उसने जवाब दिया “मैं गुस्सा करना चाहती तो हूँ पर तुम्हारी शक्ल देखकर मुझसे होता नहीं है पर शरीफ़ को एक झापड़ ज़रूर मारना है।” मैंने कहा, “इसके लिये तुम बेफिक्र रहो 50 लात घूंसों में एक झापड़ तुम्हारा भी पड़ जाएगा।”

रात को लड़कों के साथ बाहर खाना खाने गए। वहाँ बातें हुईं और माँ के जाते ही शरीफ़ को पीटने का प्लान भी बन गया। लड़कों के ग्रुप में अब मुझे लीडर वाली फीलिंग आने लगी थी। आशिक़ इमेज को काफी हद तक कवर कर लिया गया था। खाना खा कर बाहर निकलते वक्त हमने देखा कि एक लड़का मोबाइल पर बात करते करते हमारी बाइक पर थूक रहा था। मैं अपने साथ आये लड़कों को किनारे करते हुए वहाँ गया और उस लड़के दो थप्पड़ जड़ दिए। बाकी लड़को ने गरियाना शुरू कर दिया तो वह लड़का वहां से चिल्लाते हुए भागने लगा। हम थोड़ी देर वहीं खड़े हुए बकर कर ही रहे थे कि उस लड़के के साथ 10-12 और लड़के आ गए। मेरे साथ 5-6 लड़के थे, हम सारे अलग दिशा में भागने लगे। मुझे रास्ते की तरफ़ एक स्कूटर वाला दिखा तो उसे हाथ देकर उसके पीछे बैठ गया। घर पहुँचकर नॉर्मल होने के लिए माँ से बातें की। पूजा को फ़ोन किया और कहा कि माँ तुमसे मिलना चाहती हैं। उसने कहा मिल लूँगी लेकिन ‘एज़ अ फ्रेंड’।

अगले दिन मैं माँ को लेकर पूजा के हॉस्टल गया। पहली बार गेट क्रॉस करके सामने के हॉल में गया। पूजा मरून सूट पहने कटहल के पकौड़े और चाय लेकर आयी। मेरा यह मन था कि पूजा मेरी माँ के पैर छू ले पर उसने हाथ जोड़कर नमस्ते किया। माँ ने कुछ देर पूजा से बात की और मुझे कहा कि लड़की मुझे बड़ी पसंद है, सेकंड ईयर में तुम दोनों की इंगेजमेंट कर देंगे और थर्ड ईयर में शादी और एमबीए दोनों शादी के बाद साथ साथ करना।

सेकंड ईयर का इंतजार मुझे कई कारणों से था पर अब प्रमुख कारण मिल गया था। सोच रहा था कि सेकंड ईयर में मेरे जूनियर्स आ जाएँगे। उनको पीट-पीटकर कॉलेज में अच्छा रुतबा बन जायेगा, उसमें से कुछ भाई भाई भी करेंगे जिससे सीनियर्स पर भी प्रेसर बना लेंगे। इस सब के बीच हम इंगेज भी हो जाएंगे। राजा वाली फीलिंग आ रही थी कि एक मिनट में पूजा के भाई की याद आ गयी। उस आदमी को कैसे मनाया जाएगा। उसके भाई को याद करके लगा कि पूजा स्ट्रांग लड़की है और वह अपने घर को वह खुद संभाल लेगी। पर पूजा? उसको भी तो मनाना होगा। वह मुझसे शादी का सोचती भी हो या नहीं इस ख़याल ने तो मुझे बेचैन ही कर दिया। इतने में कपिल का फ़ोन आया कि गुमटी नम्बर 5 में शरीफ को अकेले देखा गया है। माँ को मैंने घर चलने को कहा। जाते वक्त माँ ने पूजा को एक हज़ार रुपये दिए। पूजा ने मना किया पर माँ की ज़िद की चली। पूजा माँ को छोड़ने आयी और बाइक पर बिठाते वक़्त उसने माँ के पैर भी छू लिए।

हवा में बाइक लहराता हुआ मैं झट से माँ को रूम पर छोड़कर शरीफ़ को पीटने निकल पड़ा। मेरे गुमटी नंबर 5 पहुंचने तक शरीफ़ को बहुत लाते पड़ चुकी थीं। मुझे देखकर उसने कहा, “भाई मैंने तो मदद करनी चाही थी।” मैंने उसे देखा और कहा,” मैंने आज तक हज़ार गलतियां की हैं पर पूजा मुझे माफ़ कर देती है क्योंकि मेरे इरादे बुरे नहीं होते।” अब तुम कूटे जाओगे क्योंकि तुम डिज़र्व करते हो और तुम जिससे बदतमीज़ी कर रहे थे, वह तुम सब सालों की ‘भाभी’ है।

क्रमश: …

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-1

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-2

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-3

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-4

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-5

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-6

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-7

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-8

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-10

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-11

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-12

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।

2 thoughts on “मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *