मंडली

मेरी गर्लफ्रेंड-8

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गतांक से आगे

मैथ्स के एग्जाम से यह पता चल गया था कि पूजा मेरा भला ही चाहती है। मुझे अजीब लग रहा था, जैसे मैथ्स की ही किसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए सही फॉर्मूला नहीं मिल रहा हो। लड़कों के साथ कमरे पर जाकर मैं किचन के पास पड़े दीवान पर लेट गया। कपिल और साथी अपनी बातों में व्यस्त थे। कपिल के गांव से आए हुए लड़कों में से एक शरीफ़ मेरे पास आकर बैठ गया। कपिल ने उसे थोड़ा-बहुत मेरे हालात के बारे में बताया था। वह बातों से थोड़ी हमदर्दी जताने लगा। मैंने भी पूजा और अपनी हर अच्छी-बुरी बातों का ज़िक्र किया। उसने मेरी बातें सुनकर कहा,” भाई प्यार की बातें बेशक तुमने की हैं पर लगता है कि निभाया उसने है।”

मैंने उससे पूछा कि पूजा को कैसे मनाया जाए। उसने मुझे दो बातें कहीं,”एक तो उसे ढ़ेर सारी चॉकलेट्स, गिफ्ट्स, सॉरी का कार्ड और एक टेड्डी बीयर भेजो और दूसरा उसकी लाइफ की पुरानी बातें या कमियां पता करो।” मुझे उसकी दूसरी बात समझ नहीं आयी। उसने आगे कहा, “भाई लड़की बहुत स्ट्रांग है, उसे कमज़ोर करना पड़ेगा, तभी तुमको माफ भी करेगी और प्यार भी।” उसने समझाया,”पूजा को मैं नए नंबर से फ़ोन किया करूँगा और उसके पास्ट के बारे में बातें कर के उसे कमज़ोर करूँगा और इसी बीच तुम अच्छे बनकर उसे मना लेना।” मैंने उससे इस मदद का कारण पूछा तो उसने बदले में अपनी गर्लफ्रैंड कभी कभी रूम पर लाने की बात रखी।

मैंने बहुत गड़बड़ मचा दी थी। पूजा की नज़र में मेरी इमेज की धज्जियां उड़ चुकी थीं। शरीफ़ का आईडिया अच्छा नहीं लग रहा था पर मैंने मन मारकर शरीफ़ को पूजा का नम्बर दे दिया। उससे वादा लिया कि पूजा को फ़ोन सिर्फ मेरे साथ ही करेगा और हिदायत भी दे दी कि मेरी मदद से अलग कुछ इरादे बने तो दो टांगों पर खड़ा रहने के लिए टांगे नहीं बचेंगी।

मेरे एग्जाम्स अच्छे जा रहे थे। कपिल के साथ मिलकर कभी कॉलेज की कैंटीन तो कभी गेट पर अक्सर लड़कों से मारकूट करके मैं सोशल भी हो रहा था और आशिक़ वाली इमेज भी सुधार रही थी। हर रोज़ पूजा को मनाने के लिए मैं उसे गिफ्ट्स और चॉकलेटस भेजता था। पूजा ने इस बीच मुझसे कभी बात नहीं की। प्रभा दी से पूजा के बारे में काफी बातें मिल चुकी थीं। उन्होंने कभी मुझे पूजा के प्यार में एनकरेज नहीं किया, इसलिए मुझे प्रभा दी से भी चिढ़ होती थी।

एक दिन शाम को मेरे सामने शरीफ़ ने स्पीकर पर पूजा को फ़ोन किया। पूजा के फ़ोन उठाने पर शरीफ़ ने इस लहजे में बात करनी शुरू की, जैसे पुराना जानने और चाहने वाला हो। नाम और पहचान ना बताने पर पूजा ने फ़ोन रखने को कहा। शरीफ़ ने कहा,”मैं तुम्हारे बारे में एक एक बात जानता हूँ। इसलिए जब बात करूँ, कर लिया करना। मैं तुम्हारा आशिक़ नहीं हूँ और ना ही तुम्हें धमका रहा हूँ।” पूजा ने कुछ गालियां सुनाकर फ़ोन डिसकनेक्ट कर दिया। शरीफ़ की बातों और गाली खाकर हुई झुंझलाहट से लगा वह खुद को स्टड समझता था। कुछ देर बाद माँ का फ़ोन आया कि वह एक हफ़्ते में मुझसे मिलने आ रही हैं। अगले दिन एग्जाम था, इसलिए मैं जल्दी सो गया।

पेपर जल्दी फिनिश करके पूजा के इंतज़ार में मैं पार्किंग के सामने वाले पार्क में बैठ गया। जैसे ही उसे आते देखा मैंने थोड़ी हिम्मत की और उसके पास गया। मैंने बिना यह सोचे कि आसपास कौन देख रहा है, हाथ जोड़कर माफी माँग ली। उसकी दोस्त नेहा पास ही खड़ी थी। पूजा ने ‘इट्स ओके’ कहा और वहाँ से जाने लगी। मैंने उसे होस्टल छोड़ने को पूछा। उसने इधर-उधर देखा और हाँ कर दी। उसे बाइक पर बिठाकर मैं उसे पास के एक रेस्टोरेंट में ले गया। उसने आनाकानी नहीं की। उसने बातें शुरू कीं,”मैंने गुस्से में जो भी कहा था, उसके लिए मुझे भी माफ कर देना रोहित।” मैंने कुछ सेकण्ड्स का बड़प्पन दिखाया और उसे पिछली बातें भूल जाने को कहा। उसने आगे कहा,”लेकिन अब हम गर्लफ़्रेंड-बॉयफ्रेंड जैसे नहीं रहेंगे।” मैंने कहा,”मुझे तुमसे प्यार है और हमेशा रहेगा, मैंने हज़ार कोशिशें कर ली तुमसे नफ़रत करने की पर नहीं हुई। तुम बहुत अच्छी लड़की हो, थोड़ी अलग हो। मुझे कहीं न कहीं पता था कि तुम्हे अविनाश भैया से प्यार है पर मैं सेल्फिश बना रहा। ये सब बातें कहते कहते मेरा गाला रुंध गया।”

उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा,”तुम सारी बातें अपने मन मे ही सोचकर मुझ पर शक करते रहे, मुझे अविनाश सर् अच्छे लगते थे पर मैने उन्हें कभी भी यह नहीं बोला कि मैं उनसे प्यार करती हूँ।” मैंने कहा,”तुम मुझे कुछ बताती भी तो नहीं थी। आई लव यू कहने से प्यार नहीं हो जाता।” उसने जवाब दिया,”गुस्से में सवाल करोगे तो जवाब भी गुस्से में मिलेगा ना और प्यार ऐसे ही तो होता है। मूवीज या रियल में कहीं भी देखो सबका प्यार ‘आई लव यू’ कहने से शुरू होता है और कहने के बाद ऐसा मान लिया जाता है कि प्यार हो गया।” मैंने मन ही मन सोचा यह लड़की अच्छी है पर थोड़ी ट्यूबलाइट भी है। मुझे डर था कि पूजा उस दिन लड़की घुमाने वाली बात पर कुछ कहेगी पर ऐसा नहीं हुआ। कुछ देर बाद मैं उसे उसके होस्टल छोड़कर वापस अपने रूम पर आ गया।

वापस आकर मैंने शरीफ़ को कहा कि पूजा को फ़ोन या मैसेज करके तंग करना छोड़ दे। शरीफ़ ने हामी भर ली। दो-तीन दिन यूँ ही बीत गए। अब एग्जाम्स खत्म होने वाले थे। मैं आखिरी पेपर के लिए पढ़ाई कर रहा था कि पूजा का फ़ोन आया और उसने मुझे मिलने को बुलाया। मैं बाइक उठाकर तुरंत उसके होस्टल के बाहर पहुंच गया। तभी शरीफ़ का फोन आ गया कि उसकी गर्लफ्रैंड उससे मिलने रूम पर आयी है और रूम लॉक है। चाभी लेने के लिए मैंने उसे पूजा के हॉस्टल के बाहर बुलाया। इसी बीच पूजा आ चुकी थी। पूजा ने मुझे बताया कि एक लड़का उसे कॉल और मैसेज करके परेशान कर रहा है। मेरे नॉलेज में शरीफ़ ने एक दो कॉल किये थे और उसके बाद मैंने उसे मना कर दिया था। मैंने उससे लड़के का नंबर माँगा। पूजा ने अपने फ़ोन में उसके कुछ बेहूदा से मैसेज दिखाए जिनमे लिखा था,”मैं जानता हूँ तुम कैसी लड़की हो, तुम्हारी वजह से एक लड़के ने सुसाइड कर लिया और तुम जैसी लड़की घर पर रहती तो अब तक भाग चुकी होती।“

मेरी खोपड़ी सन्न हो गयी। मन कर रहा था कि शरीफ का खून कर दूँ। पूजा मेरे पास ही खड़ी थी। इतने में मुंह पर कपड़ा बांधे शरीफ़ आ गया। मैंने शरीफ़ को कोने में ले जाकर उसे धमकाया। उसने वापस जवाब दिया, “तुम्हारे कहने पर ही तो कर रहा था।” वह चाभी लेकर चला गया। मेरे मन का गिल्ट मुझे सांस नहीं लेने दे रहा था। 10-15 मिनट्स सोचने में वेस्ट किये फिर मैंने पूजा को अपने प्लान और शरीफ़ के बारे में बता दिया। इससे पहले मैं पूजा का लप्पड़ खाता, मेरी मेरी माँ का फ़ोन आ गया। उन्होंने मुझे तुरंत रूम पर आने को कहा साथ ही यह भी कि रूम अंदर से लॉक्ड है और दरवाजा कोई खोल नहीं रहा है।

क्रमश: …

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-1

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-2

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-3

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-4

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-5

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-6

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-7

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-10

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-11

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-12

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।

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