मंडली

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-7

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गतांक से आगे

मैं एकदम पगलाकर आसपास बैठे सभी लड़कों को फ़ोन के उस फोल्डर में मेरी फोटोज़ दिखाने लगा। कपिल इस पागलपन का कारण समझ रहा था। उसकी सुई अभी भी मुझे पड़ी मार और उसे टोपा कहे जाने पर अटकी थी। उसने मुझे याद दिलाते हुए कहा,”अब क्या उस लड़की के पैर पकड़ लोगे? और ऐसा जताओगे जैसे सारी गलती तुम्हारी ही थी। ऊपर से तुमने जो हरकतें की हैं, वो उन बातों को भूलेगी भला।”

मुझे समझ आ गया था कि मैंने बहुत छीछालेदर मचा दिया था, अब उसे समेटना भी था और मुहब्बत में आगे बढ़ना भी था। मैंने माफ़ी माँगने के सिलसिले में प्रभा दी से पूजा के भाई का नंबर अरेंज किया और उन्हें कॉल लगायी। इससे पहले कि मैं उन्हें अपने साथ हुई गलतफहमी के बारे में बताता, उन्होंने गालियाँ बककर फ़ोन काट दिया। मैंने टेक्सट कर के उन्हें लिख दिया “सम्मान में गाली सुन लिए हैं, मार खा लिए हैं वरना हमारे खून की गर्मी पूरे कानपुर में फेमस है।“ यह मैसेज करके मैंने पूजा के भैया का नंम्बर ब्लॉक कर दिया और दूसरी सिम का भी इंतजाम कर लिया।

कपिल ने हौसला दिलाया कि समझदारी से सब निपटाना होगा पर अभी पढ़ाई पर ध्यान दिया जाए। मैंने प्रभा दी को कॉल करके कहा,”पूजा से बोल दीजिये मुझे उसे फ़ोन वापस करना है।” नया नंम्बर भी माँगा पर दीदी ने मना कर दिया। मैं पूजा पर बीच-बीच में गुस्सा हो रहा था पर उससे ज़्यादा मुझे खुद पर गुस्सा था। उसने मेरे मन में शक पैदा किया कि वो मुझे प्यार नहीं करती पर मैंने वैसी हरकतें कर दी जिससे मेरा प्यार कहीं से साबित नहीं होता दिखा। जब कभी लो फ़ील होता था, पूजा का फ़ोन उठाकर उस फोल्डर को देख लेता था जिसमें नब्बे प्रतिशत मेरी और दस प्रतिशत उसकी और मेरी फोटोज़ थीं।

एग्जाम शुरू हो चुके थे। पहला पेपर इकोनॉमिक्स का था। विचार यह था कि ताक-झांक कर कैसे भी पासिंग मार्क्स तक का इंतज़ाम कर लिया जाएगा। तीनों सेक्शन के बच्चे अलग अलग बैठाए जाने थे पर साइकोलॉजी वाली मैम ने हर सेक्शन से एक से बीस तक रोल नंम्बर वाले बच्चों को ऑडी में बिठा दिया। मैंने क्लास के लगभग हर कोने में नज़र घुमायी पर पूजा नहीं थी। मुझे अजीब लग रहा था क्योंकि उसका रॉल नम्बर तो सात था। ख़ैर, पेपर बंट गए और सबने लिखना शुरू किया। मैंने देखा कि पूजा की दोस्त मेरे बगल में बैठी थी। वह मुझे देखकर कुछ ज़्यादा ही ख़ुश होती थी, इसलिए मैंने उसे एग्जाम में हेल्प करने के लिए बोला। उसने मेरे पाँचों मेंडटेरी सवालों के जवाब लिखवा दिए।

मैं आखिरी सवाल का जवाब लिख ही रहा था कि मैंने देखा पूजा पेपर सॉल्व करके अपनी कॉपी टीचर को जमा कर रही थी। उसने व्हाइट टॉप और ब्लू जीन्स पहनी हुई थी और ऊँची पोनी किये बालों को बाँध रखा था। मैं उसे देख ही रहा था कि उसकी दोस्त ने मुझसे कहा कि ‘उई माँ’, ये कितनी जल्दी सब लिख लेती है। मैंने शब्दों पर ध्यान दिया तो मुझे इस बार चिढ़ नहीं हुई, ज़रा सी मुस्कुहाट आयी। ख़ैर, मैं समझ गया कि पूजा अभी तक मेरे पीछे बैठी थी और अगले सारे पेपर्स में ऐसे ही होने वाला है।

रूम पर आया तो अगले एग्जाम मैथ्स की बात होने लगी जो हम में से किसी को नहीं आती थी। मैथ्स के नाम पर हमने सोचा था कि दसवीं तक की मैथ कोर्स में होगी पर यह बारहवीं तक की थी। एक बार किताब खोलकर प्रोबेबिलिटी, डिफ्फरेंसिअशन और इंटेग्रेशन पढ़ने की कोशिश की लेकिन पढ़ते ही ऐसा लगा जैसे आँखें पथरायी जा रही हैं। हम सब फ़ेल होने वाले थे। कोई रास्ता भी नहीं था। पूजा मैथ्स टॉपर थी पर उससे बातचीत भी नहीं हो पायी थी। उसकी दोस्त भी कॉमर्स स्टूडेंट रही थी। इस मामले में वह भी मदद नहीं कर सकती थी। कपिल ने मुझे कहा,”अगर पूजा मुझे मैथ्स में हेल्प कर दे तो मैं उसे माफ करने की सोच सकता हूँ।” मैंने मन ही मन कपिल को लप्पड़ मारने का सोचा, फ़िर जाने दिया। शाम को खाना खाया और पूजा के फ़ोन से अपने कुछ फोटोज़ अपने फोन में ले लिए। फिर कुछ मन में आया तो बाइक उठायी और कपिल को पीछे बिठाकर पूजा के हॉस्टल चल दिया। प्रभा दी को होस्टल के नीचे बुलाया और उन्हें पूजा का फ़ोन थमा कर वापस आ गया। उन्होंने जाते-जाते मुझे कहा, “तुम बेवज़ह खुश हो रहे हो। तुम्हें पता भी है कि वो तुम्हें प्यार करती है या नहीं।” मैंने बाइक मोड़ते हुए जवाब दिया, “कल पता चल जाएगा।“

अगले दिन कपिल और मैं ऑडी को जा रहे थे। उसने मुझे पूछा कि आज कैसे पता चलेगा कि वो तुम्हें चाहती है? मैंने कुछ जवाब नहीं दिया और जाकर ऑडी में बैठ गया। जवाब मेरे पास था भी नहीं। ख़ैर, मैंने चोर नज़र से देख लिया कि पूजा मेरे पीछे चुपचाप बैठ गयी है। पेपर बँटने खत्म ही हुए कि अनाउंसमेंट हुआ कि सब अब अपने अपने क्लास में बैठकर परीक्षा देंगे। साठ-सत्तर बच्चे ऑडी में बैठे थे, कॉपी पर इनविजीलेटर के साइन होने थे और पूरे प्रोसेस में बीस मिनट लगने थे। मात्र बीस मिनट ही थे मेरे पास आसपास किसी से नकल करने के। मैं खुद को फेल होता देख ही रहा था कि पीछे से एक धक्का आया और धक्के के साथ मेरी कॉपी किसी और कॉपी से बदल गयी। मेरी दिल की धड़कन तीन कारण से बढ़कर चार गुनी हो चुकी थी एक, अगर पकड़े जाते हैं तो ईयर बैक लगेगी। दूसरी, अगर फेल हो गया तो बैक पेपर में भी हेल्प करने वाला कोई नहीं मिलेगा। और तीसरी, यह पूजा थी!

मेरे आँसू रुक नहीं रहे थे कि आज उसने इतनी हिम्मत के साथ साबित किया कि वो मुझे सच में प्यार करती है। पूजा ने मेरा मैथ्स का वो पेपर अठ्ठारह मिनट में पूरा कर दिया और झटके से आगे बढ़कर कॉपी बदल गयी। इससे पहले मैं उससे आंखे भी मिला पाता, वह उठकर टीचर के पास गयी, कॉपी पर साइन कराए और आगे वाले गेट से मुझे पीठ दिखाकर चली गयी। मैं उसको जाते हुए देख ही रहा था कि कपिल ने मेरी कॉपी मुझसे छीन ली। मैं इतना बेबस महसूस कर रहा था कि मुझे रोने के लिए भी अब पूजा के ही कंधे चाहिए थे। सोंचकर यकीन नहीं हो रहा था कि मैंने यह सब क्या गड़बड़ कर दिया। दोस्तों के साथ पेपर ओवर होते ही मैं बाहर निकला। मुझे लग रहा था कि पूजा जा चुकी होगी। पूजा को मनाने के जतन सोच रहा था कि कपिल ने कहा, “अबे रोहित, कहीं हम लोग टॉप कर लिए तो?”

क्रमश: … 

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-1

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-2

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-3

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-4

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-5

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-6

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-8

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-10

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-11

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-12

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।

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