मंडली

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-4

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गतांक से आगे

मैं हमेशा यही सोचता था कि जब पूजा को प्रोपोज़ करूँगा तो आसपास फिल्मी माहौल रखूँगा पर आज जल्दबाजी में ऐसा कुछ इंतज़ाम नहीं हो पाया। कई ख़याल मन में घर कर रहे थे। कुछ पूजा के सामने अपनी बात रखने की हिम्मत दे रहे थे तो कुछ सदैव के लिए उसे खो देने का डर।

शाम को मैं अपने उरई के एक दोस्त के साथ उसके हॉस्टल गया। मैंने उसे फ़ोन करके बाहर आने को कहा। उसने लाल रंग का सूट पहन रखा था। कुर्ते की बाँहें और पैर गीले थे जिससे लग रहा था कि वह कपड़े धो रही थी। मैंने दोस्त को किनारे खड़ा कर पूजा से बातें शुरू की। मैं असहज हो रहा था। बातों ही बातों में मैंने उसे पास के साइबर कैफे चलने को कहा। मैंने पूजा को बिठाया पर बाइक बीच में ही रोक दी। उसने पूछा, “अगले हफ्ते से मिड सेम शुरू ही रहे हैं। तैयारी हो गयी?” मैंने कहा, “बाकी सारे विषय ठीक ही हैं। बस अकाउंटस और मैथ्स पर ध्यान देना है। अच्छा पूजा, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। उसके लिए कुछ जानना भी ज़रूरी है।“ उसने मुझसे बात पूछने को कहा। मैंने पूछ लिया कि क्या वह किसी को पसंद करती है। उसने ‘हाँ’ में जवाब दिया। मुझे बहुत बुरा लगा पर मैं इसके लिए तैयार था। मैंने कहा, “इस बात से मुझे इतना फर्क नही पड़ता कि मैं अपनी बात नहीं रखूँ।“

“पूजा मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ। तुम अच्छी लड़की हो, इसलिए हमेशा करता रहूँगा। तुम्हारी फिक्र में बस मैं यह नहीं चाहता हूँ कि किसी गलत लड़के से तुम्हारा अफ़ेयर हो और तुम परेशान रहो।“ मैंने इतनी बात कही और गाड़ी उसके हॉस्टल की ओर मोड़ ली। उसने उतरते वक़्त पूछा, “इतना ही बात थी?” मैंने कहा, “और हो सके तो कल से मैथ्स पढ़ा देना।“

दोस्त से मैंने इमेज मेंटेनेन्स के चक्कर मे कह दिया कि पॉजिटिव जवाब है। रात को सभी दोस्तों को पार्टी देकर मैं सो गया। सुबह उठा तो बहुत सारे ख़यालों ने मन को घेर लिया। प्यार क्या होता है, मुझे पता नहीं था पर कुछ बातें मालूम थीं। जैसे प्यार में कुछ भी कर जाने की क्षमता होती है। जिससे हम प्रेम करते हैं, उसके खिलाफ़ मुकदमा भी हम ही दायर करते हैं, उनसे मिली उपेक्षाओं पर उसकी वकालत भी ख़ुद ही करते हैं और उसके पक्ष में फैसला भी खुद ही देते हैं। मालूम था कि यदि कोई आपसे कहता है कि वह आपसे प्यार करता है/ करती है और किसी ऑड सिचुएशन में वह आपसे बिना बात किये चौबीस घण्टे गुज़ार ले तो उसका प्यार और भावनाएं झूठ हैं। साथ ही ‘कुछ कुछ होता है’ मूवी से काजोल का ‘मेरा पहला प्यार अधूरा रह गया’ डायलॉग भी याद आ रहा था।

अगले दिन क्लास खत्म करके मैं पूजा के पास गया। उसने कहा कि वह पढ़ रही है और आज नहीं पढ़ा सकती। मैंने ज़िद करके उसे हॉस्टल के बाहर बुलाया और गाड़ी को अपने रूम की तरफ़ मोड़ लिया। रूम पर पहुंचकर मैंने मैथ्स की कुछ किताबें उठायी और उसके पास बैठ गया। वह कंप्यूटर टेबल के पास बैठी थी। मैं भी उससे सटकर बैठ गया। वह पूरे मन से पढ़ाने का नाटक कर रही थी कि मैं रोने लगा और उसके कंधे पर अपना सर रख दिया। वह असहज होकर उठकर जाने को हुई। मैंने उसे रोका। मैं उसे गले लगाने ही वाला था कि उसे किसी का फ़ोन आ गया। उसकी बातों से लगा कि अविनाश सर थे। पूजा तुरंत घर के बाहर निकल गयी। वह मुझसे नज़र नहीं मिला रही थी। मैंने उसे उसके हॉस्टल छोड़ दिया। फिर एक दो दिन ठीक से बात नहीं हुई।

सोमवार को हमारा पहला एग्जाम था। कॉलेज गया तो देखा कि एग्जाम कैंसल हो गया है। पता चला कि A सेक्शन का कोई सीनियर नहीं रहा। इसलिए अगली तारीख तक एग्जाम पोस्टपोन हो गए हैं। मेरा मन नहीं लगा और मैं वापस रूम पर आ गया। फ़ोन साइलेंट पर था, इसलिए देख नहीं पाया कि पूजा की 15-20 मिस्ड कॉल्स और मैसेजज पड़े थे। मैंने हड़बड़ाकर उसे फ़ोन किया। वह बहुत रो रही थी। उसने बस इतना कहा कि अविनाश सर ने सुसाइड कर लिया। मुझे पूजा की चिंता हो रही थी। इसलिए मैंने कपिल को भेजकर उसे रूम पर बुला लिया। पूजा बस रोये जा रही थी। मुझे जानना था कि वह ऐसे क्यों रो रही है, जैसे अविनाश सर के सुसाइड का कारण वह खुद को मान रही हो।

मैंने उसे शांत किया। उसने बताया, “सुबह मुझे अविनाश सर के किसी दोस्त का फ़ोन आया था। उसने कहा कि सर मुझे मिलना चाहते हैं पर मैंने मना कर दिया और कहा कि आज मेरा एग्जाम है और मैं रिवीजन कर रही हूँ। मैंने सुना कि उस दोस्त ने सर से टौंट कर कहा कि लड़की अभी नहीं मिल सकती क्योंकि उसका रिवीजन चल रहा है और फ़ोन डिसकनेक्ट हो गया। मैं कैसे जी पाऊँगी इस दोष के साथ। मैंने उनकी बात जानने की भी कोशिश नहीं की। मेरा मरने का मन हो रहा है।“ मुझे पूजा की बात सुनकर बहुत दुख हुआ। अविनाश भैया अच्छे इंसान थे पर मेरी नज़र में पूजा का कोई दोष नहीं था। मैंने पूजा के नज़रिए से भैया को समझना चाहा। इसलिए कुछ और सवाल किए पर वह ऐसे रोये जा रही थी कि मेरे मुँह से निकल गया,”पूजा, मै तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। तुम्हें रोता हुआ नहीं देख सकता।“ उसने सिसकते हुए कहा, “रोहित, मैं भी।“

क्रमश:

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-1

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-2

मेरी गर्लफ्रेंड भाग-3

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-5

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-6

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-7

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-8

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-9

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-10

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-11

मेरी गर्लफ्रेंड: भाग-12

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।

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