मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है! – मंडली
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है!

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मनुष्य सामाजिक प्राणी है, ऐसा मनुष्य अपने आप को कहता है। पशु-पक्षी-वृक्ष आदि इस विषय में क्या सोचते हैं, इस पर विचार कभी किया नहीं गया। उसके जैसे चार जीव एकत्रित हो जाएँ, तो मुनष्य को एक समाज बनने की सम्भावना दिखती है। यदि समाज पहले से उपलब्ध हो तो कोई सामाजिक संस्था तो बन ही सकती है। सामाजिक संस्था का काम सामाजिक समस्याओं का समाधान करना होता है, किन्तु यदि समस्या उपलब्ध न हो तो समस्या को उत्पन्न करने की जिम्मेदारी भी ऐसी सामाजिक संस्थाएँ अपने कन्धों पर ले सकती हैं।

एक बार समस्या उत्पन्न हो जाए तो फिर उसे जड़ से मिटाने का प्रयास सामाजिक संस्थाएँ वर्षों तक कर सकती हैं। सनद रहे, समस्याओं को मिटाने का प्रयास करना ही संस्था का कर्त्तव्य है, समस्या को मिटाना नहीं। समस्या की जड़ के पीछे नहीं पड़ना बल्कि उसे जड़ बनाना। समस्या मिट गई तो फिर कोई समस्या पैदा करनी पड़ेगी। समस्या पैदा करना कोई आसान काम नहीं होता। १९४७ से पहले भारतवर्ष की समस्या थी पराधीनता। जैसे ही वह समस्या सुलझने को हुई तो भारतीय समाज के ठेकेदारों ने पाकिस्तान नाम की नई समस्या को पैदा कर दी। मनुष्य सब बदल सकता है, किन्तु पड़ोसी नहीं। बुरा पड़ोसी होना सबसे बड़ी समस्या है। अच्छे-बुरे पड़ोसी ही आपस में मिलकर एक समाज बनाते हैं। पड़ोसियों के व्यवहार से ही किसी सोसाइटी या कॉलोनी के विषय में लोगों की धारणा बनती हैं। फलां कालोनी रहने के लिए उत्तम है क्योंकि लोग सभ्य हैं, शांत हैं, सफाई है वगैरह।

कुछ कॉलोनियाँ स्वप्नलोक जैसी होती हैं, जहाँ महलों जैसे बंगले होते हैं। उसके बाद आती है बारी हाईराइज़ टाउनशिप वाली सोसाइटियों की। बंगले में जाने का अवसर तो इस गरीब देहाती को नहीं मिला लेकिन प्लम्बर, डिलीवरी बॉय, इलेक्ट्रिशियन आदि न होने के बावजूद हाईराइज़ सोसाइटी में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके लिए अपने मित्रों का आभारी हूँ। वहाँ मैंने चाय भी पी है और एक दो बार खाना भी खाया है। मेजबानों ने कॉफी पिया और लंच किया।

हाईराइज़ सोसाइटी में घुसना एक युद्ध जीतने के समान है। गेट पर बैठा हुआ गार्ड आपका इंट्रोगेशन करता है। आपको लिफ्ट के पास रोककर आपके बताए हुए फ्लैट में फोन करके पूछता है, “फलां आदमी आया है भेज दें?” आपका भाग्य और आपके मित्र का मूड हुआ तो कह देगा कि भेज दो। हो सकता है इतनी देर में आपको अपने आप में ऐसा लगे कि लौट जाना चाहिए, इतने बड़े वी.आई.पी को क्या तंग किया जाए। कल्पना में आपको यह भी लग सकता है कि गार्ड आपकी शक्ल देखकर ही आपको मवाली न समझ रहा हो या अपने गाँव के हरिया या माधौ का लड़का समझकर आपको पहचानने का प्रयास कर रहा हो। आप अड़े रहिये और कुछ सोचते हुए खड़े रहिए।

हाईराइज़ सोसाइटी में समस्या भी हाईराइज़ टाइप की होती है, सिक्यूरिटी, सेफ्टी वगैरह। इसीलिए गार्ड रखे जाते हैं। हमारी सोसाइटी लो-बजट वाली लो-राइज़ इमारतों की सोसाइटी है और यहाँ की समस्या भी अपने स्तर के अनुसार लो-लेवल की है। यहाँ की समस्या है हमारा एक विशेष पडोसी और दूसरी समस्या है कुत्ते। दोनों मे कुछ बातें समान हैं। दोनों हमारी सोसाइटी को धर्मशाला समझते हैं और सोसाइटी के सेक्रेटरी को देखकर गुर्राते हैं। दोनों के मुँह कोई लगना नहीं चाहता। दोनों को कोई काटना या उनसे कटवाना नहीं चाहता। इसलिए दोनों पक्षों में कोई आपसी बहस नहीं होती। लेकिन हमारे पड़ोसी को मनुष्य समझते हुए सेक्रेटरी साहब कहते हैं कि मेंटेनेंस का पैसा दे दीजिये तो पडोसी का उत्तर होता है, “कैसा मेंटेनेंस?”

सेक्रेटरी: यही चौकीदार, साफ़ सफाई, टूट फूट वगैरह।

पड़ोसी: चौकीदार किसकी चौकीदारी करता है?

सेक्रेटरी: यही गाडियाँ, घर व आने जाने वालों की।

पड़ोसी: हमारे पास तो गाडी है ही नहीं, फिर हमारे किस काम का?

सेक्रेटरी: आपका घर तो है।

पड़ोसी: घर में तो हम रहते हैं।

सेक्रेटरी: इसीलिए तो मेंटेनेंस देंगे न?

पड़ोसी: नहीं चौकीदार का नहीं देंगे। और रास्ते से निकलना दो ही बार होता है, दफ्तर जाते समय और आते समय। उसके आलावा उस रास्ते पर क्या होता है, हमें क्या लेना देना? उस टूटे हुए गेट को तो हम छूते भी नहीं। सफाई वाले से कह दीजिये कि हमारा दरवाज़ा छोड़ दे आज से।

सेक्रेटरी साहब अपना सा मुँह लेकर रह जाते हैं। फिर मीटिंग में मुद्दा उठाते हैं कि कैसा असामाजिक प्राणी है जी। ऐसे लोग झगडे के लिए अवसर ढूंढते हैं और हर अवसर के लिए विषय इनके पास होता है। महीने भर यदि झगड़ा न हो तो विशिष्ट अपच हो जाती है। फिर ये किसी भी बात पर किसी से भी कभी भी झगड़ सकते हैं। ये हमारे समाज की समस्या हैं, सामाजिकता पर की बाधा हैं । ऐसा कहते हुए सेक्रेटरी स्वयं त्यागपत्र देने उतावले हो उठते हैं, लेकिन मनाए जाने पर मान जाते हैं क्योंकि वे तो सामाजिक प्राणी हैं, कोई और हो न हो।

लेखक: अजय चन्देल (@chandeltweets)

कवर फोटो सौजन्य: tpsgnews.com (Via – Google)

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