महाराष्ट्र का थ्रिलर: क्लाइमेक्स या एंटी-क्लाइमेक्स – मंडली
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महाराष्ट्र का थ्रिलर: क्लाइमेक्स या एंटी-क्लाइमेक्स

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जिस जिस पर ये जग हँसा है

उसी ने इतिहास रचा है …

शायर संजय राउत यह शेर गुनगुना रहे थे। दाद देते हुए उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए सिलवायी अपनी सेकुलर शेरवानी का ट्रायल कर रहे थे। तभी ANI के ट्वीट ने वज्रपात कर दिया – देवेन्द्र फड़णवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। उद्धव ने राउत का क्या हाल किया, यह पता तो नहीं चल पाया लेकिन एक नवोदित शायर राउत शिवसेनपुरी ने संजय राउत को ट्रॉल किया …

महल सुन्दर सपनों का बनाया सो ढह गया

इतिहास जो रचा जाना था रचने से रह गया

पहले लगा कि ANI ट्वीटकार का फोन उसके भाँजे के हाथ लग गया है और वह मजे लेते हुए आरटी बटोर रहा है, लेकिन कुछ ही क्षणों बाद फड़णवीस और उनके ‘चक्की पीसिंग’ दादा अजीत पवार क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेते टीवी पर दिख गये। सूत्र बताते हैं कि शायर संजय राउत ने बिना ट्वीट किए ही ताना कसा …

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों

मीडिया सूत्र और सोशल मीडिया के राजनीतिक विशेषज्ञ हक्के बक्के रह गये कि आखिर हो क्या रहा है। अखबारों में सीएम उद्धव ठाकरे थे और टीवी चैनल्स पर देवेन्द्र फड़णवीस। घटनाक्रम धीरे-धीरे परत दर परत खुलने लगा। पता चला कि सुबह पौने छह बजे महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया। सुनकर बहुत अच्छा लगा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल, राष्ट्रपति भवन और राजभवन इतनी सुबह से काम करना आरम्भ कर देते हैं और देर रात तक देशहित में खटनी करते रहते हैं। महाराष्ट्र के लोग सरकार के लिए बावले हो रहे थे, इसलिए सुबह के आठ बजते बजते मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को शपथ दिला दी गयी। बस एक ही कसर शेष रह गयी कि अजीत पवार को उनका प्रिय सिंचाई मंत्रालय आवंटित नहीं किया।

आनन फानन में शरद पवार ने अजीत पवार के केसरिया रंगरोगन को उनका बगावती फैसला करार दिया। लोगों ने इसे नूरा-कुश्ती समझकर खारिज कर दिया। मीडिया के सूत्र और सूत्रधार भी आम लोगों की तरह कयास ही लगाते पाए गए। तभी किसी कर्मठ खोजी पत्रकार ने सुप्रिया सुले के WA स्टेटस ने यह राज फाश कर दिया कि पवार परिवार और उनके दल का विखंडन हो गया है। पत्रकारिता की गहराई के नित नये बनते कीर्तिमानों में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। अबूझ राजनीतिक चालें WA स्टेटस से समझी जाने लगीं। माननीयों के लिए भी यह गर्व का क्षण था कि जय या क्षय के समय भी वे पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपना WA स्टेटस बदलते हैं।

एक-दो घंटे किंकर्तव्यविमूढ़ बने रहे संजय राउत ने शायरी छोड़ वर्ड प्ले पर रुमाल फेंक दिया। उन्होंने जोरदार वापसी की – पाप के सौदागर। पता नहीं वह किसे सौदागर कह रहे थे, शरद पवार को या अजीत पवार या किसी और को। उन्होंने यह भी कहा कि रात नौ बजे तक साथ रहे अजीत पवार नजर नहीं मिला पा रहे थे। यह सुखद लगा कि राजनीतिक आँखों में अब भी कुछ शेष है। खबर आयी कि सुबह साढ़े ग्यारह बजे शिवसेना, काँग्रेस और ‘बची खुची’ एनसीपी की साझी प्रेस वार्ता होगी। काँग्रेस ने प्रेस वार्ता से अलग होकर साझी वार्ता की आधी हवा निकाल दी। किसी सलाहकार ने काँग्रेस आलाकमान को समझा दिया था कि महाराष्ट्र के इस पचड़े से निकलकर देश में ध्रुवहीन हो चुकी काँग्रेस महाराष्ट्र में एक ध्रुव बन सकती है। फिर मरता क्या न करता …

प्रेस वार्ता में शरद पवार क्या कह रहे थे, यह हम दिल्ली वाले नहीं समझ पाए क्योंकि वह मराठी में बोल रहे थे। समझने को तो मराठीभाषी भी उतना ही समझे जितना हम मुलायम सिंह को सुनकर समझते हैं। बहरहाल, कुछ लिप रीडर्स की मदद से बात सामने आयी। यह पक्का हो गया था कि अजीत पवार ने एनसीपी तोड़ दी है। शरद पवार ने अजीत पवार पर विधायकों को मॉर्निंग वॉक के बहाने शपथ ग्रहण में ले जाने का आरोप लगाया। वह फड़णवीस सरकार के बहुमत सिद्ध न कर पाने पर आश्वस्त दिखे। लोगों ने यकीन नहीं किया, उल्टे उनकी खिल्ली उड़ायी गयी कि आप तो अमित शाह को भी चुनौती दे रहे थे – सरकार बनाकर दिखाओ। उधर उद्धव ठाकरे ने भी संजय राउत के भरोसे रहना उचित नहीं समझा और उन्होंने सरकार गठन के कार्यक्रम को भाजपा का ‘फर्जिकल स्ट्राइक’ बता दिया। काँग्रेस ने भी अपने दो-तीन थके चेहरों को मीडिया के सामने लाकर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली। उधर बिहार से खबर आयी कि राजद के उपेक्षित सह-कलाकार तेज प्रताप यादव स्वयं में अजीत पवार की छवि देखकर चौड़े हुए जा रहे हैं।

आदर्शवादी बेमेल और अनैतिक गठबंधन के ताने ऐसे देने लगे गोया शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस का महाराष्ट्र विकास अगाड़ी ‘मेल’ गठबंधन ही नहीं बल्कि ‘एक्सप्रेस सुपरफास्ट’ और नैतिक गठबंधन भी था। मोरल हाई फुदककर हाईट पर चला गया। फड़णवीस के ‘चक्की पीसिंग’ पंच का वीडियो चलाकर उन्हें ट्रॉल किया जाने लगा। दिन को काला बताते हुए लोकतंत्र की दुहाईयाँ दी जाने लगीं। भाजपा समर्थक अमित शाह के मास्टरस्ट्रोक के कसीदे करने लगे। सच में यह मास्टरस्ट्रोक था। विरोधियों की छोड़िए, अति सक्रिय समर्थकों को भी अजीत पवार पर चढ़ी भ्रष्टाचार की धूल साफ करने का मौका नहीं मिला। छि छि और वाह वाह के बीच वस्तुस्थिति यह थी कि सरकार भाजपा की बने या शिवसेना की, लोकतंत्र दोनों ओर जीत रहा था। लोकतंत्र की तमाम टूटती वर्जनाओं में सेकुलरिज्म और करप्शन की वर्जना का टूटना भी आवश्यक है। किसी की सरकार बने, एक का टूटना तय है।

मौका पर चौका मारकर गवर्नर साहब दिल्ली निकल गये। लोकतंत्र की रक्षा के उपक्रम किए जाने लगे। मामला सर्वोच्च न्यायालय भी पहुँच गया। पाँच सितारा होटल और रिसॉर्ट लोकतंत्र बचाने में सदैव आगे रहे हैं। एनसीपी के विधायक होटल में शिफ्ट किए गए। विधायकों को ले जा रहे मर्सिडीज बेन्ज के ड्राइवर के भाजपा समर्थक होने पर कोहराम भी हुआ। विधायकों को केरल शिफ्ट करने की बात भी उठी। काँग्रेस ने ‘हमारे 44 सुरक्षित’ का दावा करते हुए अपने विधायकों को भोपाल भेजने की बात कही। कमलनाथ बिफड़े, “यहाँ एमपी के काँग्रेस विधायक बचाना मुश्किल है और ये …” शिवसेना के विधायक पहले से ही पाँच सितारा होटल में कंचन चर रहे हैं। भाजपा विधायक मन मसोसकर अपना आटा गीला करते हुए दाल-रोटी खा रहे हैं।

शाम में अजीत पवार एनसीपी विधायक दल के नेता और चीफ व्हिप पद से हटा दिए गये। रात तक धीरे धीरे यह साफ हो गया कि 10-11 विधायकों को छोड़कर एनसीपी के सारे विधायक शरद पवार के ही साथ हैं। यह थ्रिलर का क्लाइमेक्स है या एंटी-क्लाइमेक्स, इस निष्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश करने वालों को कवि हृदय मराठी नेता रामदास अठावले ने चेतावनी दी …

चाहे खाओ भिंडी, चाहे खाओ गोश्त

पर पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त

#MaharashtraCM

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#DevendraFadanvis

#AjitPawar

लेखक गद्य विधा में हास्य-व्यंग्य, कथा साहित्य, संस्मरण और समीक्षा आदि लिखते हैं। वह यदा कदा राजनीतिक लेख भी लिखते हैं। अपनी कविताओं को वह स्वयं कविता बताने से परहेज करते हैं और उन्हे तुकबंदी कहते हैं। उनकी रचनाएं उनके अवलोकन और अनुभव पर आधारित होते हैं। उनकी रचनाओं में तत्सम शब्दों के साथ आंचलिक शब्दावली का भी पुट होता है। लेखक ‘लोपक.इन’ के लिए नियमित रुप से लिखते रहे हैं। उनकी एक समीक्षा ‘स्वराज’ में प्रकाशित हुई थी। साथ ही वह दैनिक जागरण inext के स्तंभकार भी हैं। वह मंडली.इन के संपादक है। वह एक आइटी कंपनी में कार्यरत हैं।

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