कश्मीर का नया बिहान – मंडली
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कश्मीर का नया बिहान

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जीवन में वह क्षण बहुत खास होता है जब आप गलत सिद्ध कर दिए जाएं या हो जाएं लेकिन आपको खुशी हो। ऐसा ही एक क्षण हमें केन्द्र सरकार ने अपनी ढ़ृढ़ इच्छाशक्ति और अडिग निर्णय से दिया है। इस निर्णय ने कश्मीर की संभावनों पर की गयी हमारी विवेचना को गलत साबित किया। फिर भी पूरे देश की तरह हमें भी अत्यंत हर्ष हुआ है। मंडली कश्मीर सहित पूरे देश को बधाई देती है और सरकार को साधुवाद।

कल तक यह प्रश्न था कि क्या होगा। जो होना था, वह हुआ ही नहीं बल्कि ऐसा हुआ कि देश की अपेक्षाओं को पूरा करते हुए इतिहास बना गया। प्रश्न यह था कि 35A जाएगा या 370 की छुट्टी होगी या जम्मू-कश्मीर राज्य का विभाजन होगा। मोदी सरकार ने कहा- तीनों होगा। यह अपेक्षाओं से बड़ा था।

आगे का रास्ता कितना साफ या जटिल होने वाला है, इस पर कोई भी कयास लगाना खतरे से खाली नहीं है। उसके गलत सिद्ध होने की संभावना अत्यधिक है किन्तु यह कौतूहल तो होगा कि कश्मीर, जम्मू और लद्दाख का स्वरुप क्या होगा और नये स्वरुप में कितनी कानूनी और विधायी जटिलताएं एवं अड़चनें आएंगी। यह भी यक्ष प्रश्न होगा कि कश्मीर के ताजा घटनाक्रम से देश की राजनीति और भारत की अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति पर कैसा प्रभाव होगा।

जम्मू कश्मीर जैसे विशेष दर्जे के राज्य को केन्द्र शासित क्षेत्र में बदले जाने पर प्रशासनिक और विधायी जटिलताओं का आना स्वाभाविक है। न्यायालय में मामले को ले जाने या न्यायालय से इस पर कोई बाधा आने की आशंका भी निर्मूल नहीं है। सरकार की योजना की अब तक की कुशलता और गोपनीयता को देखते हुए ऐसी आशा की जा सकती है कि सरकार ने इस पर एक ठोस खाका तैयार किया होगा जिसमें चुनौतियों को रेखांकित किया गया होगा और उससे निबटने की रणनीति तैयार की गयी होगी।

यह स्पष्ट है कि कश्मीर के केन्द्र शासित प्रदेश बनते ही वहाँ के कानून व्यवस्था और अन्य मुद्दों की सीधी जिम्मेदारी केन्द्र की होगी। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इस चुनौती के लिए तैयार है। अलगाववादी हुरियत नेताओं के साथ निश्चित ही सख्ती होने वाली है और उग्रवादी समूहों पर कठोर कार्रवाई। देखने वाली बात यह होगी कि अब्दुल्ला और मुफ्ती पर सरकार का रुख क्या होता है क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में ये अलगाव की तरफ और अधिक झुके दिखेंगे। ऐसा इन दोनों के ट्वीट्स से साफ हो गया है। कश्मीरी जनमानस भारत सरकार के इस निर्णय के लिए न तैयार था और न ही इस पर खुश होगा। लिहाजा उन्हे हुरियत व सीमा पार स्थित उनके आकाओं द्वारा भड़काए जाने की पूरी संभावना है। भारी मात्रा में सुरक्षा बलों की तैनाती अकारण नहीं है। सनद रहे, इस फैसले से लद्दाख और जम्मू की जनाकांक्षाएं पूरी हुई हैं। इसलिए इन भागों से सरकार को प्रचंड जनसमर्थन मिलेगा।

देश की आंतरिक राजनीति पर भी इसका गहरा असर होने वाला है। नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता ही नहीं बल्कि उनका नैतिक बल भी बढ़ेगा। देखना होगा कि इस नैतिक बल से वह लोक लुभावन नीतियों से परे अर्थव्यवस्था पर कितने कड़े और साहसिक निर्णय लेते हैं। कल सेंसेक्स 600 अंक नीचे लुढ़का और रूपया कमजोर हुआ। आशा की जानी चाहिए कि यह एक अल्पकालिक प्रभाव सिद्ध होगा। सरकार के इस अभूतपूर्व निर्णय से जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। इससे न्यायालय में लंबित अयोध्या मुद्दा भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा। कांग्रेस, वाम दलों और समाजवादी कुनबों की ‘संविधान की हत्या’ और ‘लोकतंत्र के लिए काला दिन’ जैसी प्रतिक्रियाएं अनपेक्षित नहीं हैं। सरकार के सामने इनसे भी निबटने की चुनौती होगी। इसके लिए जन समर्थन का नैतिक बल सरकार के पास है क्योंकि इसके बाद राष्ट्रवादी भावनाओं का ज्वार आना स्वाभाविक है।

पाकिस्तान की स्थिति पर कड़ी नजर होगी। वहाँ निश्चित ही हताशा का माहौल होगा और इससे सीमा पर तनाव बढ़ सकता है लेकिन इन परिस्थितियों में न तो युद्ध ठीक होगा और न ही युद्ध की संभावना बताना सही। सरकार कूटनीतिक स्तर पर निश्चित ही सक्रिय होगी। यह तब और भी महत्वपूर्ण है जब अमेरिका अफगानिस्तान से निकलने की जुगत में है और पाकिस्तान से उसे मदद की जरुरत है। सरकार ने अन्तर्राष्ट्रीय बिरादरी की प्रतिक्रियाओं के लिए भी कूटनीतिक तैयारी कर रखी होगी। चीन पर भी हमारे रक्षा विशेषज्ञों की पैनी नजर होने की अपेक्षा है।

१९७५ के सिक्किम विलय को आज याद करना अप्रासंगिक नहीं होगा। यह महज संयोग है कि सिक्किम विलय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दो नौकरशाह पी एन हक्सर और आर एन काव कश्मीरी पंडित थे। कश्मीर पर रचे गए इतिहास से विस्थापित कश्मीरी पंडितों को ही सबसे अधिक खुशी हुई होगी। उनकी दु:स्वप्न सी यादों और दशकों की करुणा के बीच एक आस दिखी होगी और घर वापसी की मद्धिम संभावना जगी होगी। देखना यह होगा कि सरकार के पास पाकिस्तान प्रायोजित चरमपंथ का शिकार इस भद्र समूह के लिए क्या योजना है। मंडली की कामना है कि कश्मीर का यह नया बिहान कश्मीरियों के साथ साथ विस्थापित कश्मीरी पंडितों के जीवन का भी चिर प्रतीक्षित नव प्रभात सिद्ध हो।

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