मंडली

जीवट और जिजीविषा के परीक्षा की घड़ी

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विश्व के अनेक देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है। इरान, इटली और स्पेन जैसों देशों में हाहाकार मचा है। इंगलैंड, अमेरिका और अन्य देश भी इसकी चपेट में हैं। अलबत्ता, वायरस के उद्गम चीन के इस वायरस से उबरने की खबरें आ रही हैं। भारत भी कोरोना वायरस से अछूता नहीं है। यहाँ अब तक 236 लोगों में इसके संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। पिछले दो-तीन दिनों में यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। स्थिति चिन्ताजनक है पर ऐसी कतई नहीं कि इससे निबटा नहीं जा सके। बस आवश्यकता यह है कि सरकारी एजेंसियों के सलाह का पालन करके हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान इस तरह रखें कि उससे दूसरों के लिए आरोग्य भी सुनिश्चित हो। ऐसा करते हुए हम सब कोरोना से सफलता पूर्वक लड़ सकते हैं। सनद रहे, यह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के जीवट और जिजीविषा के परीक्षा की घड़ी है।

कोरोना से निबटने की प्रक्रिया के बीच राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सबसे संकल्प और संयम का आह्वान किया है। एजेंडा, प्रोपगंडा और फेकिंग न्यूज स्थिति को और विकट बना रहे हैं। सनसनी और अफवाहों  से किसी का भला नहीं होने वाला। निराशा तो किसी भी स्थिति में कोई समाधान है ही नहीं। अफवाहों को रोक नहीं सकते तो कम से कम उसका हिस्सा न बनें। निराशा से बचा जाए। संकट में थोड़ा मौन भी आवश्यक होता है। और यदि बोलना ही है तो शुभ शुभ बोला जाए, सब कुछ शुभ ही होगा।

जिस समय जग झूमता हो दादूरों का शोर सुनकर,

उस समय मे कोयलों का मौन रहना ही उचित है। — निकुंज

स्थिति से निबटने के लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें हरसंभव कोशिश कर रही हैं। सरकारी प्रयास अपर्याप्त सिद्ध होंगे, यदि जन सामान्य ने जागरूकता नहीं दिखायी और सहयोग नहीं किया। लखनऊ में एक सेलेब की लापरवाही निन्दनीय है और संभवत: आपराधिक भी। यह विचलित करती है। इसलिए ऐसा जतन करने की आवश्यकता है कि ऐसे और मामले न हों और वायरस के मास-स्प्रेड के खतरे से बचा जा सके। सनद रहे, सरकार जो कर रही है, अच्छा कर रही है। जो करेगी, सरकार ही करेगी। हमें अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करना है। युद्ध सी स्थिति में नागरिक कर्तव्यों के अनुपालन के अतिरिक्त सरकार का समर्थन भी आवश्यक है। राजनीति, राजनीतिक छींटाकशी और व्यंग्य कुछ दिनों के लिए परे रखा जाए। एक बार इस विपदा से निबट लें, फिर सबकी सूद समेत भरपाई की जा सकती है।

अफवाहों के कारण लोग-बाग दैनिक उपयोग की सामग्रियों का भंडारण कर रहे है जबकि सरकार हर तरह से यह भरोसा दिला रही है कि इन चीजों की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी। अनावश्यक और असहज रूप से बढ़ी माँग हमारे वितरण नेटवर्क पर बुरा असर डालेगी और इसका लाभ उठाते हुए कालाबाजारी और जमाखोर कृत्रिम कमी सृजित करके चीजों का दाम बढ़ाएंगे। इस स्थिति में सरकार द्वारा इन पर कुछ किए जाने की सीमा होगी। अत: अनावश्यक भंडारण से परहेज किया जाए।

कोरोनो जागरुकता के लिए प्रधानमंत्री ने रविवार को ‘जनता कर्फ्यू’ एवं चिकित्साकर्मियों का अभिनन्दन किए जाने का आह्वान किया है। इसे सफल बनाया जाए और इस बात के लिए तैयार रहा जाए कि हमें थोड़ी दिक्कत हो सकती है। रविवार के बाद भी जहाँ तक संभव हो इस कर्फ्यू को आगे बढ़ाया। सिर्फ आधिकारिक लॉकडाउन के भरोसे नहीं रहा जा सकता। ऐसा करने में सरकार की अपनी सीमाएं होंगी। हालाँकि सरकार को भी यह सोचने की आवश्यकता है कि अर्थव्यवस्था फिर सुधर जाएगी, यदि इस संकट से हम उबर गये। कम से कम ३१ मार्च तक प्रभावित शहरों और क्षेत्रों में संपूर्ण बंदी हो। इसके लिए सरकार की ओर से एडवाइजरी नहीं बल्कि बाध्यकारी आदेश जारी हों। अर्थव्यवस्था और अन्य मुद्दे फिलहाल गौण समझे जाएंगे। कहीं देर न हो जाए और फिर हम हाथ मलते न रह जाएं। रही बात लोगों की तो रोजी, रोजगार और व्यापार जीवन के सरोकार हैं, जीवन नहीं। जीवन अमूल्य है और इसकी रक्षा हर कीमत पर की जानी चाहिए।

वैश्विक महामारी के संकट की इस घड़ी में मंडली राष्ट्र के सरोकारों के साथ खड़ी है। वह कोरोना से लड़ने के लिए अदम्य संकल्प के साथ संयम रखने की शपथ लेती है। वह प्रधानमंत्री द्वारा आहूत ‘जनता कर्फ्यू’ का पुरजोर समर्थन करती है। ‘युद्धरत’ चिकित्सा कर्मियों, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करते हुए उनका अभिनन्दन करती है। मंडली उन स्वयंसेवकों और गैर-सरकारी संगठनों का भी आभार व्यक्त करती है जो इस युद्ध में अपना योगदान कर रहे हैं। साथ ही वह पीड़ितों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करती है और यह आशा व्यक्त करती है कि यह वैश्विक आपदा शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी।

 

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