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एक सकारात्मक आह्वान – जनता कर्फ्यू

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चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब वैश्विक महामारी बन चुका है। अब तक इसके 2.5 लाख से ज्यादा मामले आ चुके हैं, 10000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और 170 से ज्यादा देश इससे प्रभावित हैं। भारत भी इसकी चपेट में है। देश में भी 250 से ज्यादा मामले आ चुके हैं और 4 मौतें हो चुकी हैं। भारत में यह वैश्विक महामारी अभी दूसरे चरण में है, महीने के अंत तक इसके तीसरे चरण में पहुँचने की आशंका है।

ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आम जनता इसका ज्यादा से ज्यादा बचाव करें। यह वायरस एक दूसरे के संपर्क में आने, हाथ छूने आदि से फैलता है।  इसलिए बचाव ही इसका अबतक एकमात्र और सहज तरीका है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए 19 मार्च को प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ‘जनता कर्फ्यू’ की अवधारणा प्रस्तुत की और जनता से इसका आह्वान किया। जनता कर्फ्यू यानि जनता के द्वारा, जनता के लिए और स्वयं जनता पर लगाया कर्फ्यू।

प्रधानमंत्री जी ने अपील की है कि इस रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक आप अपने आपको घर पर ही रखें, अनावश्यक बाहर न निकलें। इसके दो फायदे होंगे – पहला: जो लोग संक्रमित हैं उनके भीड़ में जाने से असंक्रमित लोगों में संक्रमण फैलने का जो खतरा है वह नहीं होगा और  दूसरा: इस एकदिवसीय जनता कर्फ्यू के माध्यम से सरकार को भी आगामी तैयारी के बारे में अनुमान होगा और इससे जनता भी भविष्य में किसी भी संभावित स्थिति से निबटने को तैयार होगी। जनता कर्फ्यू के परिणामों के आधार पर सरकार अपनी तैयारियों का जायजा लेगी और यह भी देख सकेगी कि ऐसे कर्फ्यू कितने कारगर होंगे।

प्रधानमंत्री ने एक और आह्वान किया है कि इस दिन शाम 5 बजे अपने दरवाजे पर या बालकनी में खड़े होकर ताली बजाकर, थाली बजाकर, घंटी इत्यादि बजाकर उन लोगों का धन्यवाद करें जो इस संकट की घड़ी में अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना देवदूत बनकर इस महामारी और आम जनता के बीच खड़े हैं। इन तरीकों से हम न सिर्फ सेवारत कर्मियों, चिकित्सकों और अधिकारियों का धन्यवाद करें और अभिनन्दन करें बल्कि यह एहसास भी कराएं कि इस वैश्विक महामारी से निपटने में हम भारतवासी एक हैं।

कुछ बुद्धिजीवी प्रधानमंत्री के इस आह्वान का मजाक उड़ा रहे हैं। वे पूछते हैं कि कोरोना वायरस क्या केवल रविवार को ही आएगा, या ताली और थाली बजाने से क्या कोरोना खत्म हो जाएगा। तर्क और कुतर्क के बीच का बारीक अंतर समाप्त करने वाले ऐसे लोगों को या तो इस महामारी की जानकारी नहीं है, या विश्व में इस महामारी से जनित स्थिति का भान नहीं है।  इन लोगों से संकट की बस यही निवेदन किया जा सकता है कि उपरोक्त तथ्यों को पढ़ें, विश्व भर में इस अघोषित युद्ध से लड़ रहे योद्धाओं के समर्थन में उसकी जनता के क्रियाकलापों को देखें, फिर यहां सरकार के प्रयासों पर बोलें।

यह सच है कि सरकार की आलोचना करना आपका अधिकार है, लेकिन संकट के समय में सरकार के साथ एकजुटता से खड़े रहना और सरकार के अच्छे कदमों के लिए उसकी प्रशंसा करना आपका कर्तव्य भी है। यह इस महामारी के खिलाफ अघोषित युद्ध का समय है। यदि आप इसमें योद्धा बनकर जा नहीं सकते तो जो योद्धा मुकाबले में हैं कम से कम उनके उत्साहवर्धन के लिए युद्धनाद (ताली बजाना, थाली बजाना, घंटी बजाना इत्यादि) कर ही सकते हैं। राजनीतिक मत, धर्म या जाति कुछ भी हो पर कोरोना को तो सब भगाना चाहते हैं। आइए, राजनीतिक और अन्य मतभेदों को परे रखकर कोरोना के खिलाफ युद्ध में भारत और पूरे विश्व को विजयी बनाएं। भारत जीतेगा, जीवन जीतेगा और कोरोना हारेगा।

जय हिन्द!

लेखक – रजत वैश्य ‘सूरज’ (@rajatvaishsuraj)

 

2 thoughts on “एक सकारात्मक आह्वान – जनता कर्फ्यू

  1. शाबाश जिन्दाबाद,जबरदस्त
    लगे रहो।

  2. शाबाश जिन्दाबाद,जबरदस्त
    लगे रहो दोस्त।🤟🤟👍

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