मंडली

चिदूगेट के बाद धरने पर लोकतंत्र

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देश के पूर्व गृह व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर पूरे देश ने राहत की साँस ली है। कांग्रेस विरोधियों को तो मुँहमाँगी मुराद पूरी हो गयी है। चिदंबरम और कांग्रेस के समर्थक तक कह रहे हैं, “चलो, फजीहत खत्म हुई।”

चिदंबरम की गिरफ्तारी से देश मे एक तरफ जहाँ राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है, वहीं एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है। हर छोटी बड़ी बात को लोकतंत्र की हत्या बताने वाले डिजिटल पत्रकारों ने इतनी बड़ी घटना पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। बेचारे कितना कहें, सो चुप रह गए। परिणामस्वरूप इस तरह खुद की उपेक्षा किये जाने से लोकतंत्र आहत हो गया और राजघाट पर धरने पर बैठ गया। लोकतंत्र का कहना है कि उसने पिछले 73 सालों में राज परिवार की सेवा की है और राज परिवार ने भी स्वयं को लोकतंत्र फ्रेंडली दिखाया है। उसने खुद को उनकी सुविधा के अनुरूप ढाला है। फिर भी ऐसे अहम मौकों पर उसकी हमेशा उपेक्षा की गई है।

धरने की खबर मिलते ही राजभवन में हलचल तेज हो गईं। रात को ही मशहूर व्यापारी और धरतीपुत्र रॉबर्ट वॉललगा लोकतंत्र को मनाने पहुँचे। उन्होंने अपने हालात का हवाला देकर लोकतंत्र को समझाने की कोशिश की कि उनकी स्थिति भी लोकतंत्र से अलग नही है पर वह तो धरने पर नहीं बैठते। उनकी बेटर हाफ भी धरना मोड में आती हैं तो वह उन्हें भी किटी पार्टियों और पेज थ्री हैपेनिंग्स का हवाला देकर बुला लेते हैं। रोज रोज उन पर बनते जोक्स को भी वह सह लेते हैं लेकिन यह सब सुनकर भी लोकतंत्र मौन रहा और टस से मस नही हुआ।

हमारे संवाददाता ने जब इस मामले पर मशहूर डिजिटल आलोचक और अपने निरर्थक प्रश्नों से अपने लिए गालियाँ आमंत्रित करने लिए कुख्यात श्री बालूतोष जी से बात की तो उनका कहना था कि वह सिर्फ व्हाट्सएप पर मिले ऑर्डर देखते है और डिसीजन लेने का अधिकार उनके पास नही है। इसलिए बड़े साहब ही जबाब दे पाएंगे। वहीं एक दूसरे डिजिटल ज्ञानी व एक्स पत्रकार और वन्नाबी यूटूबर अभिलाष शर्मा ने इसे हेडलाइट से जुड़ी समस्या बताया। उनका कहना था कि लोकतंत्र की हेडलाइट में हुई तकनीकी खराबी से ये व्यवधान आया है, जिसे जल्द ही गाली देकर सुलझा लिया जाएगा। उनका यह भी कहना था कि ऐसी यांत्रिक गड़बडिय़ों का उनके पास अचूक इलाज है। वह हेडलाइट को सार्वजानिक और निजी रूप से गालियां देकर गड़बड़ी ठीक कर देंगे।

एक तरफ बड़े नेताओं पर गिरती गाज और दूसरी तरफ लोकतंत्र की इस नाराजगी से कांग्रेस अब चारो तरफ से घिर गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मेहुल जी संपर्क करने पर जबाब मिला, “जिनका लिखा हुआ हम बोलते हैं, उन्ही से पूछ लो। हम वीजा अफेयर्स में बिजी हैं।” हमारा संवाददाता उस ‘लेखक’ की खोज में पूरी लुटियन में भटक रहा है। मेहुल जी का भाषण लेखक समझकर जिसके पास जाता है, वह उसे एक नया पता बता देता है। उधर लोकतंत्र बिना खाए पिए धरने पर बैठा है, इधर हमारा संवाददाता भूखे रहकर भजन कर रहा है।

भविष्य में क्या होगा ये तो कहना मुश्किल है पर कांग्रेस की ये कलह कॉमेडी शो की कमी से परेशान जनता के लिए बारिश की फुहार सी आई है । घटना की आगे भी जानकारी के लिए पढ़ते रहिए मंडली.इन। अपने संवाददाता के सफर पर भी हम आपको अपडेट करेंगे।

लेखक@Fussy_Ca

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