मंडली

अच्छा हो या बुरा, पर ‘बिग बॉस’ तो है …

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आवाज़ में एक अलग जादू होता है। किसी की आवाज़ दिन बना देती है तो किसी की आवाज़ दिन खराब करने की ताकत रहती है। आवाज़ मधुर होती है, कर्कश होती है पर सबसे अहम मायने लहज़ा रखता है। लहजा आपके अंदर के देव, शैतान या इंसान को बाहर निकालता है। आवाज़ का खेल की बात करें तो देश के रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ की बात करना वाज़िब है। यह शो UK के शो ‘बिग ब्रदर’ से प्रेरित है। इस शो के एक सीज़न की विजेता हमारी अपनी शिल्पा शेट्टी रही हैं।

भारत मे ‘बिग बॉस’ शो 2006 में आरम्भ हुआ था। यह शो इस देश में बहुत चर्चित है। इसकी खूबियाँ शो का फॉरमेट, बड़े-छोटे सेलेब्रिटीज़, बिग बॉस को आवाज़ दे रहे व्यक्ति की रूहानी आवाज़ और लोकप्रिय अभिनेता सलमान खान हैं। वेब सिरीज़ के युग में बिगबॉस जैसे रियाल्टी शोज़ को सास-बहू सीरियल जैसी इज़्ज़त मिलने लगी है। कई लोग शो का नाम सुनते ही तीन कोने का मुँह बना लेते हैं पर चुपके से देखते ज़रूर हैं। कई लोग वास्तव भी इसे अपसंस्कृति मानते हैं लेकिन इस बात पर गौर नहीं कर पाते कि ये आ कैसे गयी। कई वैलेन्टाइन्स डे पर डंडा भाँजते रह गये और उनकी नाक के नीचे बिग बॉस ने जगह बना ली।

एक बार मेरी मित्र ने मुझे डिनर पर निमंत्रित किया। सारे भूखे बेतुकी बातें करके एक दूसरे को बोर कर ही रहे थे कि मेरी मित्र चौंक कर बोली, “टीवी रूम में चलो बोग बॉस शुरू होने वाला है।“ मैंने सास-बहू के सीरियल जैसा एक सौ अस्सी डिग्री सर मोड़ कर पूछा, “यह क्या नया तोता पाल लिया?” उसने जवाब दिया कि पहले दिन देखा था तब से आदत पड़ गयी, सलमान खान के नाम पर झेल लेते हैं। मैंने एक बात गौर की है, बिग बॉस और सलमान ख़ान में एक बात कॉमन है। लोग या तो दोनों के जबर फैन हैं या तो…! खैर, बात कोई भी हो पर दोनों एक दूसरे के लिए बहुत भाग्यशाली हैं। बिगबॉस की सफलता का कुछ श्रेय मिस्टर ख़ान को भी जाता है।

कई बार बिग बॉस के घर में आने वाले लोग भी कुछ कॉन्ट्रोवर्सी क्रिएट करके शो को हिट बनाने में काम कर जाते हैं। सेक्शन 375 मूवी में बतायी गयी अहम बात है, “जिस तरह क़ानून निभने का अर्थ यह नहीं है कि न्याय मिले।” उसी तरह बहुत सारे रियलिटी शोज़ के हिट होने का कारण यह नहीं होता है कि वे सच के देखने योग्य हैं। कई बार चर्चित चहरों को सामान्य जीवन जीते देखना दर्शकों के मन पर छाप छोड़ने में नाकाम हो जाते हैं। इस शो के बारे में अच्छी-बुरी बहुत सी बातें की जा सकती हैं पर इसकी गूँज के बारे में बिना बात किये रहा भी नही जा सकता।

बिग बॉस के घर की एक खासियत है कि इसमें रहने वाले भले हिंदी भाषा बखूबी नहीं जानते हों पर घर के अंदर हिंदी भाषा को बढ़ावा दिया जाता है। किसी अन्य भाषा में बातचीत करने पर घर के निर्धारित कप्तान के द्वारा दंड देने का नियम भी है। घर में अच्छाई या बुराई कोई घर तय नहीं करता बल्कि उस घर में रहने वाले लोग तय करते हैं। शो के तमाम सीजन्स में कई तरह के लोग आए। डॉली बिंद्रा की चीख की बात करें या श्वेता तिवारी की सादगी की। विंदु दारा सिंह, इम्माम, पुनीत, अली, सनी लियोन, गौहर जैसे घर आए कई व्यक्तित्वों ने अच्छाई-बुराई के नाम पर शो का मानक तय किया।

कुछ नॉन सेलेब्रिटीज़ भी घर आकर नया मुकाम तय कर गए। एक आम भारतीय मनवीर गुज्जर का घर में आकर जाते जाते विजेता बन जाना ऐसा ही एक उदाहरण है। चर्चित हो जाने के लिए बिगबॉस का विनर बनना ज़रूरी नहीं है, यह बात बाबा ओम ने साइलेंट तरीके से बता दी। गौतम के चार्म को भूलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। सनी लियॉन के नए मुकाम तक पहुँचने और ख़ुद को स्थापित करने का कुछ श्रेय बिग बॉस को भी मिलता है।

सीजन्स बहुत आये औऱ चले गए। इस समय तेरहवें सीज़न का आखिरी महीना चल रहा है। इस सीजन की ताबड़तोड़ टीआरपी ने प्रोडक्शन को इसे डेढ़ महीने और बढ़ा देने पर मजबूर कर दिया। इस सीजन की शुरुआत जय-वीरू सी दोस्ती लिए सिद्धार्थ और आसिम, माहिरा-पारस और रश्मि और देवोलीना से शुरू हुई थी। गोविन्दा की भाँजी आरती सिंह भी इस शो में इंडिविजुअल खेल रही हैं और अब तक बरकरार हैं। दोस्ती की बात करें तो अब तक पारस और माहिरा ही अब तक चहेते हैं। बाकी दो पुरुष दुश्मनी से ऊपर के माले पर चढ़कर एक दूसरे पर भौंकने का काम करते हैं।

दर्शकों का मानना है कि रश्मि का शो में योगदान ना के बराबर है। पारदर्शी व्यवहार की बात शायद सिद्धार्थ ने ही सीखी है। वैसे तो सभी घरवाले चीख-चिल्लाकर फुटेज लेने के लिए तत्पर रहते हैं पर सिद्धार्थ की स्क्रीन पर प्रजेंस शो को प्रभावी बनाती है। कुछ दिनों के लिए घर से गायब होने पर घर का सूनापन बताने पर मजबूर था कि घर के असली हीरो सिद्धार्थ ही हैं।

हाल ही में हुए #winnersid” पर प्रशंसकों द्वारा समर्थन में 3.8 मिलियन ट्वीट्स आने से लगता है कि दर्शको द्वारा इस शो का विजेता सिद्धार्थ को मान लिया गया है। ख़ैर, फिनाले का इंतज़ार है। बिगबॉस जैसे शोज़ आम जीवन में लोगों का मनोरंजन करते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। कपिल शर्मा के गुदगुदाते शो से अधिक टीआरपी वाले शो को अच्छा मानिए या बुरा पर उसकी अहमियत कम नहीं आँकी जा सकती है। कुछ के लिए अजीब दिखने वाली चीज़ें कुछ की आंखों का तारा होती हैं। देखना जरूरी नहीं है पर प्रतिक्रिया दी जा सकती है। इसी के साथ फिनाले तक के इंतज़ार के साथ आगे बढ़ते हैं।

लेखिका कहानियाँ और मुक्त छन्द कविताएँ लिखती हैं। कथा चरित्रों की सजीव कल्पना से उनकी कहानियाँ जीवन्त और मार्मिक बनती है। कहानियों और कविताओं के अतिरिक्त वह जीवन शैली, फैशन और मनोरंजन आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। फेमिनिस्ट मुद्दों पर उनके आलेख बिना किसी पूर्वाग्रह के होते हैं। लेखिका ने लोपक.इन के लिए कई कहानियां और अन्य आलेख लिखे हैं। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।

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