मंडली
बिहार चुनावों की पड़ताल-8-स्वर्णिम चुनाव परिणाम

बिहार चुनावों की पड़ताल-8-स्वर्णिम चुनाव परिणाम

बिहार में कई सप्ताह तक धुँआधार किन्तु कमोबेश स्वस्थ चुनाव प्रचार चला। धुरंधरों ने जमकर आँकलन और विश्लेषण किया। चुनाव…

बिहार चुनावों की पड़ताल-7-बिहार किधर

‘बिहार किधर’ के यक्ष प्रश्न पर आँकलन और विश्लेषण का दौर जारी है। ये सही भी हो सकते हैं और…

बिहार चुनावों की पड़ताल-6-जदयू

पटना इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र रहे नीतीश कुमार भी जेपी आन्दोलन में जेल गये। लालू प्रसाद और रामविलास पासवान 1977…

बिहार चुनावों की पड़ताल-5-भाजपा

जेपी टू बीजेपी – बिहार की राजनीति पर वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह की इस आने वाली पुस्तक का नाम यहाँ…

बिहार चुनावों की पड़ताल-4-राजद

लालू प्रसाद पटना विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से सीधे राष्ट्रीय आन्देलन में आ गये। संपूर्ण क्रांति की अलख जगाते हुए…

बिहार चुनावों की पड़ताल-3-छोटे दल

किसी भी चुनाव में छोटे दलों की अपनी भूमिका होती है। और कुछ नहीं तो वे वोटकटवा बनकर किसी के…

बाट जोहते अनगिनत ‘बाबा का ढाबा’

अशोक से खरीदा गया वो आखिरी पेन आज हाथ में है, लेकिन उससे कुछ लिखने का मन नहीं है। अशोक…

बिहार चुनावों की पड़ताल-2-लोजपा फैक्टर

1969 मे मेरा DSP मे और MLA दोनो मे एक साथ चयन हुआ।तब मेरे एक मित्र ने पूछा कि बताओ…

बिहार चुनावों की पड़ताल-1-गठबंधन

गठबंधनों की स्थिति, मुद्दे और संभावनाएँ चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी कर दिए जाने के बाद…
अपनी जयन्ती पर गाँधी बाबा की भारत यात्रा

अपनी जयन्ती पर गाँधी बाबा की भारत यात्रा

अपनी जयन्ती पर गाँधी जी ने भारत भूमि पर आने का  निर्णय किया। कुछ सच्चे गाँधीवादियों ने उन्हें रोकने की…
एक अनूठा कवि सम्मेलन

एक अनूठा कवि सम्मेलन

हिन्दी दिवस पर बड़ा ही मनोहारी दृश्य था। दो ऐसे कवि प्रेम पूर्वक मिले थे जिन्हें कवि सिर्फ वही दोनों…

पंडित नरेन्द्र नाथ मिश्र – वर्तमान के साँचे में भविष्य को ढालते कर्मयोगी

मैं शिक्षक परिवार में जन्मा और पला-बढ़ा हूँ। यूँ समझिए कि मेरी पूरी पिछली पीढ़ी शिक्षक ही थी। मेरे संयुक्त…

काँग्रेस कार्यसमिति बैठक – एक बार फिर टाँय टाँय फिस्स

दल की दशा और दिशा पर चिन्ता व्यक्त करते हुए पत्र लिखना हमारे लोकतंत्र की एक स्वस्थ परम्परा है। आम…
स्वच्छता सर्वेक्षण में गया गुजरा बिहार

स्वच्छता सर्वेक्षण में गया गुजरा बिहार

प्रधानमंत्री के प्रिय कार्यक्रमों में से एक ‘स्वच्छ भारत’ भारत सरकार का एक बेहतरीन कार्यक्रम है। सांकेतिक श्रमदान में प्रधानमंत्री…
सनसनी समाज में है चैनल में नहीं

सनसनी समाज में है चैनल में नहीं

मुझे ऐसा लगता है कि संवाद सात्विक शब्द है और बहस तामसिक। संवाद से सौहार्द उत्पन्न होता है। बहस में…
स्मृति शब्द-चित्र – स्व. नगनारायण दुबे

स्मृति शब्द-चित्र – स्व. नगनारायण दुबे

रविवार की एक दोपहर अचानक पंडित जी याद आ गये और उनकी स्मृति में मैं एक शब्द चित्र बनाने लगा।…

लोकतंत्र का हासिल सिर्फ लोकतंत्र

लोकतंत्र का उद्भव भारत में हुआ। भारत ही सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भी है। लेकिन  अमेरिका विश्व में लोकतंत्र का…

बाउंसर विपक्ष का

सजग दिखने के लिए विपक्ष का मुख्य काम सरकार पर प्रश्नों के बाउंसर दागना है। अपने पालक-बालकों से उन प्रश्नों…
पॉलिटिक्स – पुल और पैनडेमिक की

पॉलिटिक्स – पुल और पैनडेमिक की

कोरोना के कोढ़ पर बाढ़ का खाज होने के कारण बिहार सरकार डबल लोड टान रही है। यहाँ डबल इंजन…

मैं लेखक बनते बनते रह गया

स्कूली परीक्षाओं में गाय व डाकिया पर निबंध लिखने के लिए मैं ‘निबंध माला’ से रट्टा मारता था। इससे यह…

एक खुला पत्र ‘पत्रकारों’ के नाम

प्रिय पत्रकार, पत्रकार शब्द से मत चौंकिये। यहाँ इस शब्द का सामान्य अर्थ नहीं है। नाटक लिखने वाला नाटककार कहलाता…

भोजपुरी सिनेमा के तीन अध्याय

  अध्याय – एक भोजपुरी सिनेमा की दशा और दिशा के पड़ताल पर यह श्रृंखलाबद्ध लेख लिखते हुए एक दावात्याग…

हेलो इंडिया! मैं एक डॉक्टर बोल रहा हूँ …

हम डॉक्टर्स संभवत: समाज में सबसे कम संवाद करने वालों में से हैं। शायद हम अपने पेशे की आवश्यकताओं के…

टिकटॉक: वाह वाह या छि छि

टेस्ट क्रिकेट के बाद जब एक दिवसीय क्रिकेट आया तो क्रिकेट के शुद्धतावादी इतने बिफरे कि उन्होने क्रिकेट के इस…

लॉकडाउन-3: पहला दिन धूमगज्जर का

कोरोना संकट की स्थिति देखते हुए लॉकडाउन-2 के अतिंम दिनों में यह जोक बनने लगा था कि लॉकडाउन उतना ही…

लॉकडाउन पर कुछ मीठा कुछ खट्टा

कोरोना संकट से निबटने के लिए देश में संपूर्ण लॉकडाउन है। समूह पलायन से डाइल्यूशन की खबरें भी आयीं। मानव…

सीता राम चरित अति पावन

दूरदर्शन पर कालजयी टेलीविजन धारावाहिक ‘रामायण’ का पुर्नप्रसारण हो रहा है। टेलिविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) की गला काट प्रतियोगिता से…
शोले को लाल सलाम

शोले को लाल सलाम

  इतिहास किसी सटीक सहस्रकोणीय वीडियो पर आधारित नहीं होता। यह तथ्यों के अलावा इतिहासकार की कथा शैली, रूझान, आग्रह…
संपूर्ण लॉकडाउन – स्पष्ट संकल्प साफ संदेश

संपूर्ण लॉकडाउन – स्पष्ट संकल्प साफ संदेश

देश में पिछले तीन दिनों में कोरोना पॉजिटव मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है और अब यह 500 के…
जनता कर्फ्यू – न भूतो न भविष्यति

जनता कर्फ्यू – न भूतो न भविष्यति

22 मार्च 2020। संकट से निबटने के एक अनूठे तरीके का अभूतपूर्व दिन। दौड़ती सड़कें रुक गयीं, बाजार बंद रहे।…

भोजपुरी सिनेमा के तीन अध्याय – भाग: तीन

… गतांक से आगे 1990 के दशक में आ रहे तथाकथित लोकगीतों के भोजपुरी कसेट्स और वीडियो एलबम में अधिकांश…
तबही ए बबुआ समाजवाद आई …

तबही ए बबुआ समाजवाद आई …

पिछड़ा दिल्ली जाके करी ठकुराई अगड़ा लोगन के जब लस्सा कुटाई पिछड़ा अकलियत के शरबत घोराई तबही ए बबुआ समाजवाद…

भोजपुरी सिनेमा के तीन अध्याय – भाग: दो

… गतांक से आगे 1967-77 के दस साल भोजपुरी सिनेमा एक अदद फिल्म के लिए हहरता रहा, छछनता रहा। पत्थल…

लिट्टी-चोखा के बहाने बिहार की राजनीतिक पड़ताल

हमारे देश में गझिन लोकतंत्र है। दिल्ली के मालिक का रिन्युअल हुआ नहीं कि ‘कोरबो लोड़बो जीतबो’ दस्तक दे रहा…

भोजपुरी सिनेमा के तीन अध्याय – भाग: एक

भोजपुरी सिनेमा की दशा और दिशा के पड़ताल पर यह श्रृंखलाबद्ध लेख लिखते हुए एक दावात्याग देना आवश्यक है, वरना…

मैं सेफोलॉजिस्ट बनूँगा

कई लोग तो ज्योतिष को भी विद्या मानने को तैयार नहीं, कुछ तो विज्ञान की वैज्ञानिकता पर ही सवाल उठा…

आम बजट पर आम आदमी की आम समझ

वर्षों पहले माइकल जैक्शन मुम्बई आए थे। आम जनों की छोड़िए, हमारे मुम्बईया सेलेब भी वैसे ही बावले हुए जा…

विकास को प्रतिबद्ध स्वत: स्फूर्त मानव श्रृंखला की आस

दुनिया के विकसित देशों में उनके कौशल और उनके या उनके उपनिवेशों के कच्चे माल व श्रम से औद्योगिक क्रांति…
दिल्ली से आइजॉल: भाग-3

दिल्ली से आइजॉल: भाग-3

… गतांक से आगे रास्ते में जेफरी ने अपने बारे में बताना आरम्भ कर दिया। उसके पिता ने मिजोरम पुलिस…

न्यू ईयर रिजॉल्यूशन

आठ पहरिया चैनलों के एंकर भयंकर, अखबारों के स्थापित स्तंभकार व मूर्धन्य ट्विटकार पूरे साल के घटनाक्रम को ‘गागर में…

उफ्फ, एक और आन्दोलन!

देश में आन्दोलन घोटाला का पर्याय हो चुका है। अधिकांश आन्दोलनों के कारण, उनके तरीके, उनकी प्रवृत्ति, उनका कवरेज, उनसे…
महाराष्ट्र का थ्रिलर: क्लाइमेक्स या एंटी-क्लाइमेक्स

महाराष्ट्र का थ्रिलर: क्लाइमेक्स या एंटी-क्लाइमेक्स

जिस जिस पर ये जग हँसा है उसी ने इतिहास रचा है … शायर संजय राउत यह शेर गुनगुना रहे…

जेएनयू: बौद्धिक विमर्श केन्द्र या स्वयं बहस का विषय

तीन साल पहले मैं जेएनयू गया था। पढ़ने नहीं, मैं पहले से ही पढ़ुआ हूँ – ईए-बीए पास। डिग्री बता…
सौहार्दपूर्ण और समावेशी न्याय

सौहार्दपूर्ण और समावेशी न्याय

9 नवंबर की सुबह मुझे और मेरे मित्र को सड़क मार्ग से बिहार से दिल्ली आना था। 8 नवम्बर की…

महाराष्ट्र सरकार या वीरबल की खिंचड़ी

कम ही लोग जानते हैं कि ‘वीरबल की खिंचड़ी’ पकने में देरी इसलिए हुई क्योंकि खिंचड़ी का चावल दाल की…

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का स्मॉग

मत कहो आकाश में कोहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है। सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह का,…

तरुण भवतारिणी नाट्य कला परिषद

उन दिनों दीपावली से लेकर छठ पूजा तक बिहार में अनेक गाँवों की नाट्य समितियाँ नाटकों का मंचन करती थीं।…

मुस्कुराइए, आप मंडली.इन पर हैं!

हँसी जिन्दादिली का प्रतीक है, मुस्कुराहट जीवन्तता का प्रमाण। हँसी लाख दवाओं की एक अचूक दवा है, मुस्कुराहट स्वयं के…

व्यंजनों पर घमासान का समाधान

अधिकतर लोग जीने के लिए खाते हैं। कुछ खाने के लिए ही जीते है। आजकल कुछ लोग सिर्फ लड़ने के…
150 वीं जयन्ती पर गाँधी की भारत यात्रा

150 वीं जयन्ती पर गाँधी की भारत यात्रा

अपनी 150 वीं जयन्ती पर गाँधी जी ने भारत भूमि पर आने का फैसला किया। कुछ सच्चे गाँधीवादियों ने उन्हें…
विश्व पटल पर भारत की गूँज: #HowdyModi

विश्व पटल पर भारत की गूँज: #HowdyModi

आम तौर पर बहु को ससुराल में मिलने वाला मान उसके मायके की समृद्धि का समानुपाती होता है। उसी तरह…

माइक महारथी बनने का संघर्ष

हम अपनी ही नहीं बल्कि दूसरों की सफलता को भी सेलिब्रेट करते हैं। यहाँ यह भी जोड़ देना उचित होगा…
राष्ट्र भाल की बिन्दी: अपनी हिन्दी

राष्ट्र भाल की बिन्दी: अपनी हिन्दी

अभिव्यक्ति और संवाद के माध्यम भाषा के बिना मानव सभ्यता के स्वरुप की कल्पना करने पर वह मानव शरीर दिखता…
उजड़े दरबार के बेराग दरबारी

उजड़े दरबार के बेराग दरबारी

रानी की कोख से राजा के पैदा होने का क्रम लोकतंत्र में रुक जाने की अपेक्षा थी लेकिन राजनीतिक एकाधिकार…
कांग्रेस कार्यसमिति बैठक – टाँय-टाँय फिस्स

कांग्रेस कार्यसमिति बैठक – टाँय-टाँय फिस्स

सरकारी क्षेत्रों तक पहुँच रखने वाले पहुँचे हुए लोग अक्सर कहते हैं कि सरकारी बैठकों का सबसे बड़ा हासिल ‘फिरी’…
फूड ऐप पर फुटेज

फूड ऐप पर फुटेज

दो-तीन दशक पहले तक समाजवादी आर्थिक नीतियों में जकड़ा भारत मुक्त अर्थव्यवस्था की प्रगति में अकड़ने लगा है, हालांकि सरकार…
बाढ़ राहत की महिमा

बाढ़ राहत की महिमा

जनसंख्या में ज्यामितीय वृद्धि और संसाधनों की अंकगणितीय वृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रकृति रौद्र रुप धारण…
पुस्तक समीक्षा: गंजहों की गोष्ठी

पुस्तक समीक्षा: गंजहों की गोष्ठी

साकेत सूर्येश की पुस्तक ‘गंजहों की गोष्ठी’ पर यह समीक्षात्मक लेख मैं अज्ञेय की सलाह की अवहेलना करते हुए लिख…

राकेश रंजन

राकेश रंजन

 

लेखक गद्य विधा में हास्य-व्यंग्य, कथा साहित्य, संस्मरण और समीक्षा आदि लिखते हैं। वह यदा कदा राजनीतिक लेख भी लिखते हैं। अपनी कविताओं को वह स्वयं कविता बताने से परहेज करते हैं और उन्हे तुकबंदी कहते हैं। उनकी रचनाएं उनके अवलोकन और अनुभव पर आधारित होते हैं। उनकी रचनाओं में तत्सम शब्दों के साथ आंचलिक शब्दावली का भी पुट होता है।

 

लेखक ‘लोपक.इन’ के लिए नियमित रुप से लिखते रहे हैं। उनकी एक समीक्षा ‘स्वराज’ में प्रकाशित हुई थी। साथ ही वह दैनिक जागरण inext के स्तंभकार भी हैं। वह मंडली.इन के संपादक है। वह एक आइटी कम्पनी में कार्यरत हैं।

 

ट्विटर संपर्क सूत्र: @rranjan501

 

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