मंडली

रूप तेरा मस्ताना …

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आज की पीढ़ी रीमिक्स को ही असल गीत समझने लगी है। ये कोई अचरज की बात भी नहीं क्योंकि गीतों की असल जानकारी मिलना उतना आसान भी नहीं होता। रही सही कसर टी सीरीज जैसे संगीत के सौदागर पूरी कर देते हैं जब वे रीमिक्स बनाते हुए असली कलाकारों को श्रेय देना भी उचित नहीं समझते।

अगर आप पिछले बीस सालों के रीमिक्स उठाकर अगर देखंगे तो आपको ९० प्रतिशत गीत पंचम दा के ही मिल जाएंगे।

https://www.youtube.com/watch?v=joLlsVx1n7I

पंचम को नया-नया सुनने वाले जब आराधना के “रूप तेरा मस्ताना” को सुनते हैं तो उस शुरूआती अकॉर्डियन पीस सुन कर चौंक जाते हैं जिसे केरसी लार्ड सर ने अपने एक अलग ही अंदाज़ में बजाया था।

https://www.youtube.com/watch?v=HenA-OUyo0s

जबकि असल में लोगों को कुछ दिन बाद पता चलता है कि आराधना में संगीत छोटे बर्मन का नहीं बड़े बर्मन का था। ये भ्रम केवल नए सुनने वालों का नहीं, शायद आप का भी हो।

जिस बात पर सबसे ज्यादा विवाद रहा वो यही गीत था जिसका अरेंजमेंट सुनने के बाद लोगो ने मान लिया था कि बाकी गीत भले ही बड़े बर्मन साहब के हों किन्तु “रूप तेरा मस्ताना” छोटे पंचम की ही कलाकारी थी। ऐसा लोगों को इसलिए भी लगता था क्योंकि आराधना में पंचम असोसिएट म्यूजिक डायरेक्टर थे।

आप विश्वास नहीं करेंगे किन्तु छोटे बर्मन और बड़े बर्मन के फैन अलग ही हैं। दोनो के ही फैन अलग अलग तरीके से इस बात को साबित करते रहे कि इस गीत की धुन में किसका हाथ है। अब ना तो रहे छोटे बर्मन रहे और ना  बड़े बर्मन जो इस धुंध को साफ़ करते। फिर बीड़ा उठाया मोती लालवानी जी ने जो बड़े बर्मन साहब के ऊपर कई बरसों से काम कर रहे हैं। उन्होंने ८ अक्टूबर २०११ को केरसी लार्ड से बात की जिन्होंने इस बात को स्वीकारा कि ये सिर्फ और सिर्फ बड़े बर्मन साहब की धुन थी। इस गीत की रिकॉर्डिंग के समय पंचम वहां उपस्थित भी नहीं थे।

केरसी लॉर्ड ने भी इंटरव्यू में बताया था कि उस लेजेंड्री अकॉर्डियन प्रेल्युड पीस के लिए दादा ने सिर्फ यह कहा था कि “एक रोमांटिक सोंग है, हीरो- हीरोइन भीगे हुए हैं, एक फायर प्लेस है उसके करीब बैठे हैं, बहुत रोमांस है। तुमको जो बजाना है बजाओ।

उसके बाद मनोहारी दा ने जो धुन सोची हुई थी, वो केरसी को दी। केरसी साहब ने बताया था कि उसके बाद उन्होंने मनोहारी दा द्वारा दी गयी धुन में अपने एलिमेंट जोड़ते हुए पहली बार अपने अम्प्लिफेड अकॉर्डियन को इस्तेमाल करते हुए वो कारनामा अंजाम दिया था

विविध भारती को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में शक्ति सामंत जी भी ने इस बात को माना था कि आराधना के संगीत से पंचम का कोई लेना देना नहीं था।

इसी बात को पुख्ता करने के लिए कुछ दिनों बाद, १३ अक्टूबर , २००९ को मोती लालवानी जी और ऋचा लखनपाल मनोहारी दा से भी मिले जो आराधना में असिस्टेंट थे। मनोहारी दा से जब पूछा गया कि “रूप तेरा मस्ताना” के बारे में ये विवाद क्यूँ है तो उनका कहना था,“गाना बनते बनते फ़ाइनली उसका जब फिनिशिंग बनता है ना, फिनिशिंग में आता है ना, उसका शेप अलग बन जाता है। बोल आता है, बोल का वजन हो जाता है, बोलो को वजन में डालने से, इधर उधर करते, गाना शुरुआत होता है एक टाइप का ट्यून में और उसको सजाते सजाते, उसको बनाते बानाते, उसका शेप चेंज हो जाता है।”

इस गीत की रचना के बारे में मनोहरी दा ने आगे कहा,“वो रूप तेरा मस्ताना, वो दादा का ही गाना था। उस गाने को उसने ही बनाया था, दादा ने। फिर किशोर दा ने कुछ आईडिया दिया, वजन दिया कि ऐसा कुछ करेंगे गाने के बोल को, “रूप तेरा मस्ताना” गाने के बोल को थोड़ा-थोड़ा वजन देकर। फिर बाद में दादा बोले कि अरे किशोर अच्छा उस को तूने बदल दिया, अरे बहुत अच्छा किया तूने किशोर, अच्छा उसको बना दिया। किशोर दा भी ग्रेट कम्पोज़र , ग्रेट एक्टर , नो डाउट अबाउट दैट. उन्होंने कुछ बोल को करके, कुछ ऊपर नीचे करके, वजन इधर उधर करके, गाने को एक मीटर में लाया। सुर वास् नोट देयर, देन आफ्टर दैट आहिस्ते-आहिस्ते उसका सुर इम्प्रूव हुआ, उसको सुर में लाया।

मोती जी ने जब कहा कि ये तो नार्मल है, असिस्टेंट अपना सुझाव  देंगे ही। अब एस डी बी अप्रूव करेंगे या नहीं करेंगे ये उनके ऊपर है, तो मनोहारी दा का कहना था,“करेक्ट, वोही बात है। असिस्टेंट अल्वेस सजेशन देंगे, अच्छा सजेशन होगा तो वो लेलेगा। लाइन डाल भी देते हैं ऐसा कुछ गाने में। दो चार सुर के लिए गाने का रूप ही अलग हो जाता है। ऐसा होता है ना, सो वाई नोट एक्सेप्ट इट, ऐसा भी होता है।  हाँ, केरसी करेक्ट बोला है, आराधना का म्यूज़िक सब एस डी बर्मन का ही है। पूरा म्यूज़िक बर्मन साब का है। आर डी इसमें इन्वोल्व नहीं है। नहीं , आर डी इसमें इन्वोल्व नहीं है।”

दादा आगे बताते हैं कि, मैं असिस्टेंट म्यूजिक डायरेक्टर था आराधना में, मेरा पूरा अरेंजमेंट था उस मे। मेरे साथ बासु चक्रबोरती भी था, मेरा पार्टनर। हम लोगों ने मिलकर किया। दूसरी बात यह भी है, थोड़ा सा गाने सजाने के टाइममें बर्मन डा ने हम लोगों के ऊपर छोड़ दिया। बर्मन दादा बोलते थे कि उसको यह है, उसका ये रूप बताओ, उसका यह रूप दिखाना, थोडा मॉडर्न है, ऐसा है , वो है, थोडा सेक्सी बनाना।

तो हम लोगों ने सोचा, चलो ठीक है, फिर उसका रिदम पैटर्न फिक्स किया। उसमे कौन था, मैं, बासु, मारुती, पंचम,पंचम भी असिस्टेंट ही था फुल। सब हम लोग वाहन बैठके, रिदम का पैटर्न सेट करके, उसके बाद ट्यून के ऊपर एक ऐसा फ़िले होता है,ऐसा बनाया। हम लोग सब मिलकर उसको सजाया। इन सजावट में कोन्त्रिब्युशन सब का है, मेरा है, आर डी का है, बासु का है, मारुती का है। मारुती रिदम सेक्शन का पूरा देखभाल करता था। सो इट वाज़ आ टीम वर्क. हमारा टीम भी अच्छा था, बहुत ही अच्छा था एस डी बर्मन का, आर डी बर्मन का, दोनो का टीम. तो उसमे पूरा अरेंजमेंट मेरा था. कम्प्लीटली, गाने के ऊपर अरेंजमेंट करने के लिए पूरा रेस्पोंसिबिलिटी मेरा था। लिखना स्कोर बनाना, उसको अरेंज करना, गाने को आगे -पीछे करना,

 दैट वाज़ माय कोन्त्रिब्युशन…

 \अब मुझे लगता नहीं इसके बाद कोई गुंजाईश रह जाती है इस विवाद में कि आराधना का संगीत या फिर उस एक ख़ास गीत “रूप तेरा मस्ताना के  कम्पोज़र कौन थे।

मोती लालवानी जी ने के साथ मैं कई सालों से जुड़ा  हुआ हूँ। बातचीत में उन्होंने बताया था कि आराधना के  सम्बन्ध में उनके पास करीब दो दर्जन से अधिक सबूत हैं जिनमें फिल्म आराधना के संगीत से जुड़े हुए लोगों ने बताया था कि आराधना का संगीत एस डी बर्मन साहब ने ही दिया था।

फेक न्यूज़, फेस बुक और व्हाट्स एप की इस दुनिया में हम सभी को मोती लालवानी जी का धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने उस बात को रिकॉर्ड पर रखा कि आराधना जैसे कालजयी संगीत पर से दादा बर्मन का नाम न मिटे।

दादा बर्मन के साथ आपकी आराधना भी सफल हुई मोती जी…

आपको प्रणाम !

आइये सुनते हैं दादा बर्मन की कशिश भरी आवाज़ में …

सफल होगी तेरी आराधना …

https://www.youtube.com/watch?v=yYF9RIPNHac

लेखक मुख्य रूप से भावनात्मक कहानियाँ और मार्मिक संस्मरण लिखते हैं। उनकी रचनाएँ आम बोलचाल की भाषा में होती हैं और उनमें बुंदेलखंड की आंचलिक शब्दावली का भी पुट होता है। लेखक का मानना है कि उनका लेखन स्वयं की उनकी तलाश की यात्रा है। लेखक ‘मंडली.इन’ के लिए नियमित रुप से लिखते रहे हैं। उनकी रचनाएँ 'ऑप इंडिया' में भी प्रकाशित होती रही हैं। उनके प्रकाशित उपन्यास का नाम 'रूही - एक पहेली' है। उनका एक अन्य उपन्यास 'मैं मुन्ना हूँ' शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। लेखक एक फार्मा कम्पनी में कार्यरत हैं।

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