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मंडली – प्रेरणा, पथ और प्रारुप


चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ की अमर कृति ‘उसने कहा था’ हिंदी की पहली कहानी मानी जाती है। प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि में लगभग 100 वर्ष पूर्व यह कहानी लिखी गई थी। अंग्रेजी के अधिपत्य के समानान्तर चल रहे उर्दू के वर्चस्व के बीच अपने लिए जगह बनाने वाली हिंदी में आज समृद्ध साहित्य की अनुपम थाती है। देश के सत्तर प्रतिशत से अधिक जनसंख्या के लिए हिन्दी सम्पर्क की भाषा बन चुकी है।


यह सुखद है कि इंटरनेट पर भी हिन्दी का प्रसार बढ़ा है और हिंदी में खूब लिखा जा रहा है। लेकिन हमें लगता है कि जो हम कहना चाहते हैं और जिस शैली में कहना चाहते हैं, वह स्पेस अभी तक खाली है। हम धर्मयुग, दिनमान, रविवार, साप्ताहिक हिंदुस्तान और माया के युग में पले-बढ़े लोग हैं। मंडली की प्रेरणा हिंदी पत्रकारिता की वही महान परम्परा है। गुरु पूर्णिमा के पवित्र दिन मंडली आप सबके समक्ष रखते हुए हमें अपार प्रसन्नता हो रही है। आप सबके समर्थन और शुभकामनाओं से ही हमारा उपक्रम सफल हो सकेगा।


इस ऑनलाइन हिन्दी पोर्टल पर आप राजनीतिक लेखों से लेकर कथा-कहानी और हास्य-व्यंग्य पढ़ सकते हैं। अन्य विधाओं यथा, यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण और समीक्षा आदि से संबद्ध लेख भी प्रकाशित किए जाएंगे। यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य होगा कि मंडली पर प्रकाशित हर विधा के लेख सर्वथा स्वस्थ और पठनीय हों। व्यूज और क्लिक से इतर हमारा ध्यान प्रकाशित सामग्री की गुणवत्ता पर होगा।


राजनीतिक मुद्दों पर हमारे आलेख विचार के रुप में रखे जाएंगे। हमारा संपादकीय लेख स्तंभ ‘मंथन’ में प्रकाशित होगा। ‘मंथन’ मंडली का विचार होगा। अन्य राजनीतिक लेखों में व्यक्त किए गए विचार लेखक के होंगे। उनसे मंडली की सहमति आवश्यक नहीं। मंडली डेस्क लेख की गुणवत्ता और कथ्य की तार्किकता पर प्रकाशन का फैसला करेगा, न कि व्यक्त किए गए विचार का राजनीतिक मत देखकर। एक अन्य स्तंभ ‘काँव-काँव’ में हम समसामयिक मुद्दों पर एक अलग या वैकल्पिक नजरिया रखेंगे जो व्यंग्यात्मक भी हो सकता है।


‘साहित्य सुधा’ में कथा-कहानी, कविता और हास्य-व्यंग्य होंगे । हास्य-व्यंग्य के नाम पर हम किसी पर निजी हमला करने से परहेज करेंगे और श्लीलता से कोई समझौता नहीं करेंगे। व्यंग्य अपने सबसे कोमल स्वरुप में होगा जहाँ चिकुटी काटकर सहला दिया जाएगा या सहलाकर चिकुटी काटी जाएगी। यदि तीखे कटाक्षों की आवश्यकता हुई भी तो वे व्यक्तिगत नहीं होंगे। कहानियाँ लीक से हटकर होंगी, घटनाओं से अधिक चरित्र पर निर्भर होंगी। इनमें भी भाषा की शुचिता और मर्यादा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। व्यक्तिगत संस्मरण भी एक विधा के रुप में यदा-कदा प्रकाशित किए जाएंगे।


हमारे तीन मुख्य शीर्षकों राजनीति, साहित्य सुधा और स्तंभ से इतर अन्य रचनाएं विविधा में प्रकाशित की जाएंगी। हर विधा में हम अपने नियमित लेखकों के अतिरिक्त अतिथि लेखकों की रचनाएँ भी प्रकाशित करेंगे, यदि वे हमारी संपादकीय गुणवत्ता के मानकों पर खरे उतरते हैं। लेखन एक सकारात्मक व्यसन है। हमारी लेखक मंडली ऐसा मानती है। मंडली कैसा लिखती है, इसका निर्णय तो पाठक गण ही करेंगे लेकिन यहाँ यह बताना अनावश्यक नहीं है कि हमारी लेखक मंडली को अपने लेखन से अगाध प्रेम है। गुणवत्ता पर आपका निर्णय सदैव शिरोधार्य होगा।


मंडली आप सबसे ‘मनोरंजन, मनन और मंथन’ के इस उपक्रम से जुड़ने का निवेदन करती है। लेखक, पाठक, समीक्षक, प्रशंसक या आलोचक किसी भी रुप में आप सभी के जुड़ने का स्वागत है। आप सबके सुझावों का सदैव स्वागत रहेगा। आपकी प्रशंसा को हम नम्र आभार के साथ स्वीकार करेंगे एवं आपकी आलोचना को एक सीख के रुप में लेकर उसे आत्मसात करेंगे और परिमार्जन का प्रयास करेंगे।

सधन्यवाद

मंडली डेस्क